
अंबाह(मुरैना). कोई भी नदी अपने आसपास जहां प्राकृतिक संपदा समेटे हुए होती है वहीं उसके करीब एक पशु-पक्षियों व जलजीवों का संसार भी बसता है। ऐसी ही एक नदी है चंबल। जिसके नजदीक भी जलजीवों का विशाल संसार आकार लेता जा रहा है।
नदी के उसैद, किसरोली, दलजीत का पुरा घाट है। जहा इनदिनों देसी-विदेशी प्रवासी पक्षियों के साथ-साथ कई वर्षों बाद डॉल्फिन ने भी दस्तक दी है।चंबल के शांत जल, रेतीले तट और झाडिय़ों को प्रवासी पक्षियों ने अपना अस्थायी आशियाना बनाया है, वहीं अंबाह क्षेत्र में किसरोली घाट पर नदी की धारा में अठखेलियां करती डॉल्फिन प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद रोमांच का दृश्य पैदा कर रही है। चंबल नदी केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह घडिय़ाल, मगरमच्छ, कछुए और डॉल्फिन जैसे दुर्लभ जलीय जीवों के लिए भी सुरक्षित आवास मुहैया करा रही है। धूप निकलने पर रेतीले तटों पर इन जीवों को धूप सेंकते देखा जा सकता हैै।
विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में चंबल नदी का जलस्तर स्थिर रहने और मछलियों व अन्य जलीय जीवों की प्रचुरता के कारण प्रवासी पक्षी यहां प्रवास के लिए आते हैं। घाट क्षेत्र में बगुले, कलहंस, बतख, जलमुर्गी सहित कई दुर्लभ व संरक्षित प्रजातियां देखी जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि दिसंबर से फरवरी तक हर साल यह नजारा देखने को मिलता है, लेकिन इस वर्ष पक्षियों की आमद ज्यादा है। विशेषज्ञों के मुताबिक चंबल में आए प्रवासी पक्षी यहां शिकार के साथ-साथ प्रजनन भी करते हैं। वंश वृद्धि के बाद फरवरी माह के पश्चात ये पक्षी अपने मूल स्थानों की ओर लौट जाते हैं। ये पक्षी शिकार करने में बेहद कुशल होते हैं और नदी की पारिस्थितिकी को संतुलित बनाए रखते हैं।
इन दिनों चंबल नदी में इंडियन स्कीमर (पनचीरा), लिटिल ग्रीव, ग्रेट व्हाइट पैलिकन, इंडियन पोंड हेरोन, कैटल ईग्रेट, पेंटेड स्टॉर्क, एशियन स्पूनबिल, लेसर विसलिंग डक, बार-हेडेड गीज, कॉमन पोचार्ड, रडी शेल्डक, लिटिल टर्न और किंगफिशर जैसी प्रजातियां डेरा डाले हुए हैं। इंडियन स्कीमर को अपने कुनबे के साथ देखा गया है, जो जून के बाद श्रीलंका और ओडिशा के समुद्री तटों की ओर लौट जाता है।
वन रेंज अधिकारी कुलदीप शाह पंकज के अनुसार हर साल सर्दियों में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी चंबल नदी पहुंचते हैं। वन विभाग द्वारा नियमित गणना की जाती है और डॉल्फिन सहित अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के लिए लगातार निगरानी कर रहे हैं।
चंबल नदी के अंबाह क्षेत्र स्थित किसरोली घाट और आसपास कई वर्षों बाद डॉल्फिन की मौजूदगी दर्ज की गई है। राजस्थान के वन विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में राजघाट से अंडवा- पुरैनी गांव (अंबाह के दलजीत का पुरा, किसरौली गांव) तक करीब 40 किलोमीटर क्षेत्र में 13 डाल्फिन की मौजूदगी मिली है। इनमें 12 वयस्क और एक शावक शामिल है। स्थानीय भाषा में इन डॉल्फिन को ‘सुसु’ कहा जाता है, जो पूरी तरह अंधी होती हैं और शिकार के लिए अल्ट्रासोनिक ध्वनियों का उपयोग करती हैं।
Updated on:
03 Jan 2026 06:09 pm
Published on:
03 Jan 2026 06:06 pm
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