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नाबालिग से थर्ड डिग्री यातना का मामलाआरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने दो दिन का अल्टीमेटम

यूआईटी थाने में नाबालिग लोकेश निवासी झिवाना के साथ कथित अवैध हिरासत, मारपीट और थर्ड डिग्री यातना के मामले में मंगलवार को कांगे्रस के वरिष्ठ नेता परिवारीजनों से मिलने पहुंचे।

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भिवाड़ी

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Dharmendra dixit

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Dharmendra Dixit

Apr 28, 2026

निलंबन नहीं करने पर धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी

भिवाड़ी. यूआईटी थाने में नाबालिग लोकेश निवासी झिवाना के साथ कथित अवैध हिरासत, मारपीट और थर्ड डिग्री यातना के मामले में मंगलवार को कांगे्रस के वरिष्ठ नेता परिवारीजनों से मिलने पहुंचे। पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र ङ्क्षसह, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, सांसद संजना जाटव, विधायक ललित यादव, पूर्व विधायक संदीप यादव, जिलाध्यक्ष बलराम यादव, प्रकाश गंगावत, इमरान खान, विनोद सांगवान सहित अन्य शामिल रहे। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नाबालिग के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं था, उसे पुलिस उठाकर ले जाती है। उसके साथ मारपीट की जाती है। परिवार के लोगों को मिलने नहीं दिया जाता। चुपचाप अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। कागजों में लिखवाया जाता है कि खाना खाते समय नली में खाना फंस गया है। नाबालिग के हाथ पैर के ऊपर चोट के निशान हैं। पैरों में खून निकल रहा है। उसके साथ मारपीट हुई है जिसकी दोषी पुलिस है। पुलिए एसएचओ जयपुर बैठा हुआ है। वह डॉक्टर नहीं है लेकिन वह 24 घंटे वहीं है, परिवार के लोगों को डरा धमका रहा है। परिवार के लोगों को मिलने नहीं दे रहा है। पुलिस की गलती है। एसपी और अन्य अधिकारियों को दो दिन का समय दिया है। दो दिन में निलंबित कीजिए, कार्रवाई कीजिए, नहीं करने पर आंदोलन अलवर से जयपुर और दिल्ली तक किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि बच्चे के शरीर पर मारपीट के निशान हैं। भाजपा के नेता दलितों के घर जाकर एक तरफ खाना खाते हैं और इस घटना पर एक शब्द नहीं बोल रहे। राष्ट्रीय अध्यक्ष जयपुर आए लेकिन इस घटना पर कुछ नहीं बोले। भाजपा वाले जो दिखावा करते हैं, उसकी सच्चाई की तस्वीर इस घटना में दिख रही है कि आठ दिन से नाबालिग की हालत नाजुक है, उसके पैर में दो फ्रैक्चर हैं, शरीर में सूजन है, चिकित्सकों ने बताया कि बच्चा पहली जैसी स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। अभी उसे होश नहीं है, बच्चा सिर्फ आंख खोलता है। मानवाधिकार आयोग, बाल आयोग भी सामने नहीं आए हैं। एसआईटी गठन होकर जांच होनी चाहिए। देश के अंदर हिरासत में मौत होने पर प्रदेश नंबर एक पर है। कानून व्यवस्था का मजाक बना रखा है।