जमीन से 30 मीटर नीचे 12 किलोमीटर लंबी नहर से भेजा जाना है नर्मदा जल
कटनी. मध्यप्रदेश में महाकौशल के कटनी जिले में नर्मदा की जलधारा को भूमिगत रूप से 12 किमी दूर ले जाने बनाई जा रही टनल में निर्माणकार्य ठप पड़ा है। यहां जमीन से 30 मीटर नीचे बनाई जा रही देश की सबसे लंबी भूमिगत सिंचाई टनल से पानी जबलपुर से रीवा तक के चार जिलों की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित करने के लिए भेजा जाना है लेकिन दो दशक से जारी प्रोजेक्ट का अबतक 10 प्रतिशत काम होना शेष है। टनल निर्माण के लिए लगी जर्मन से आई टीबीएम मशीनों ने पत्थरों के आगे दमतोड़ दिया है। आलम यह है कि अप स्ट्रीम में सितंबर 2024 तो डाउन स्ट्रीम में जून 2024 से एक इंच भी खुदाई का कार्य नहीं हो सका है। पिछले सात माह से अप स्ट्रीम में खराब हुई टीबीएम का सुधार कराने अफसर जुटे हैं लेकिन सुधार नहीं हो सका। योजना का का कार्य वर्ष 2011 में पूरा होना था लेकिन करीब 14 वर्षों बाद भी निर्माणकार्य अधूरा है। अब अफसरों का दावा है कि दिसंबर 2025 में इसे पूरा कर लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार स्लीमनाबाद के समीप सलैया फाटक व खिरहनी में भयंकर पहाड़ को काटकर यह 12 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जा रही है। दो टीवीएम मशीनों से टनल का कार्य किया जा रहा था। इसमें डाउन स्ट्रीम करीब 5500 मीटर व अप स्ट्रीम में करीब 5400 मीटर खुदाई का कार्य पूरा हो चुका है। दोनों स्ट्रीम में कुल 1100 मीटर का कार्य शेष है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में जबलपुर जिले में सिहोरा सहित अन्य स्थानों पर इस योजना से 60 हजार हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो रही है। टनल का कार्य पूरा होने के बाद यह पानी जबलपुर, कटनी, सतना व रीवा में 2 लाख 45 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की प्यास बुझाएगा।
जम्मू में टनल बनाने वाली विदेशी हैवी मशीनें स्लीमनाबाद की भूमिगत हार्ड चट्टानों के आगे बेबस साबित हो रही हैं। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अफसरों ने बताया कि टीवीएम मशीन के हेड में 56 कटर होते है। यहां पत्थर इतना सख्त है कि एक से डेढ़ मीटर खुदाई में 5-6 कटर टूट जाते है, जिससे करीब 10 लाख की चपत लगती है, फिर नये कटर लगाए जाते हैं। अफसरों ने बताया कि टीबीएम मशीन के सुधार के लिए गड्ढा खोदा गया है। मशीन में लगने वाले पाटर््स जर्मनी से मंगवाए जाते है, जिसके यहां आने में देरी हुई है, जिसके चलते मशीन का सुधारकार्य पूरा नहीं हो पाया है।
यह टनल नर्मदा के बरगी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। नहर प्रोजेक्ट के बीच में स्लीमनाबाद पड़ता है। इसकी बसाहट को बचाने के लिए नहर की जगह टनल बनाने का फैसला 2001 में लिया गया। टनल का एक सिरा कटनी जिले के स्लीमनाबाद से लगे सलैया फाटक की ओर है। दूसरा कटनी शहर से लगे खिरहनी में। 2008 में टनल के निर्माण का काम शुरू हुआ तब इसका टेंडर 799 करोड़ रुपए था। काम की लागत अब डेढ़ गुना से भी अधिक बढकऱ 1300 करोड़ के करीब पहुंच गई है।
जानकारों के अनुसार बागुर नेवील सुरंग देश की सबसे लंबी जल सुरंग है। इसका निर्माण 1979-90 के बीच हुआ। यह कर्नाटक के हसन जिले के चन्नारायपटना तालुक के बागुर और नेविले गांवों के बीच है। यह 9.7 किमी लंबी व 75-200 फीट गहरी है। ऐसे ही राजस्थान में परवन बांध से निकलने वाली जल सुरंग 8.708 किमी लंबी व 8 मीटर चौड़ी है जो कोटा जिले के अकावद गांव से शुरू होकर बारां के गुंदलाई तक जाती है।
जिले में भले ही अबतक टनल का निर्माणकार्य पूरा न होने के कारण नर्मदा जल प्रवाहित नहीं हो सका है लेकिन इस पानी को मैहर, सतना व रीवा पहुंचाने के लिए बनाई गईं नहरों की हालत खराब हो गई है। शहर के समीप मंडी रोड में बनी नहर बीते वर्ष हुई बारिश के चलते धराशयी हो चुकी है तो स्लीमनाबाद सहित अन्य स्थानों पर भी नहर धसक चुकी है। अफसरों ने दावा किया था कि इनका सुधारकार्य गारंटी पीरियड में ठेकेदारों से ही कराया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अबतक जिले में नहर का सुधारकार्य शुरू नहीं कराया गया है।
दीपक मंडलोई, एसडीओ, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण का कहना है कि स्लीमनाबाद में निर्माणाधीन टनल में अप स्ट्रीम में सितंबर 2024 तो डाउन स्ट्रीम में जून 2024 से टीबीएम मशीन खराब होने के कारण कार्य बंद है। टनल में कुल 1100 मीटर का कार्य होना शेष है। विदेशी मशीनें होने के कारण उसके पाटर््स भी विदेश से मंगवाए गए है, जिसके कारण सुधारकार्य में समय लगा है। अप्रैल माह में अप स्ट्रीम में खराब मशीन का सुधारकार्य पूर्ण हो जाएगा, जिसके कारण कार्य शुरू हो सकेगा। दिसंबर 2025 तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा।