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पांच साल के बाद नवरात्रि में बन रहा है सर्वार्थ सिद्धी योग, बीमारियों को दूर करने के लिए करें ये उपाय

पांच साल के बाद नवरात्रि में बन रहा है सर्वार्थ सिद्धी योग, बीमारियों को दूर करने के लिए करें ये उपाय

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Tanvi Sharma

Oct 03, 2018

navratri

पांच साल के बाद नवरात्रि में बन रहा है सर्वार्थ सिद्धी योग, बीमारियों को दूर करने के लिए करें ये उपाय

अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि पर्व आगामी दस अक्टूबर बुधवार से प्रारंभ होने जा रहा है। यह नवरात्र पर्व इस साल चित्रा योग में शुरू होगा। पंडित रमाकांत मिश्रा नें बताया की कई वर्षों बाद शारदीय नवरात्रि में कई शुभ संयोग बनने जा रहे हैं। पंडित जी ने बताया की नवरात्रि किसी साल 9 दिन की होती है और किसी वर्ष में 8 दिन की होती है। इस बार नवरात्रि आठ दिन की रहेगी और इन आठ दिनों में 6 विशेष संयोग बनने जा रहे हैं। इन विशेष संयोगों से देवी आराधना का कई गुना फल प्राप्त होगा। इसमें 5 बार रवि योग और एक बार सर्वार्थ सिद्धि योग पड़ेगा ।

बुधवार को चित्रा नक्षत्र में शुरू हो रहा नवरात्र पर्व साधना की सिद्धि और तथा कार्य में प्रगति देने वाली है। अगर हम पंचांग गणना से देखें तो नवरात्रि पर्व में द्वितीया तिथि को क्षय बताया गया है। इस कारण इस बार शारदीय नवरात्रि 8 दिनों की रहेंगी। 18 अक्टूबर को महाअष्टमी बुधवार को रहेगी। गुरूवार 19 अक्टूबर को महानवमी रहेगी।

नवरात्रि के विशेष योग

15 अक्टूबर को सप्तमी-रवि योग।

1. राग निवारण के लिए नवरात्रि में करें ये उपाय

भगवान शंकर आरोग्य के देवता है। नवरात्र में शिवलिंग पर प्रतिदिन सुबह एक लोटा जल चढ़ाएं और रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें। शीघ्र ही स्वास्थ्य में लाभ होगा।

2. धन लाभ के लिए उपाय

गुप्त नवरात्रि के दौरान किसी भी दिन सभी कार्यों से निवृत्त होकर उत्तर दिशा की ओर मुख करके पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने तेल के 9 दीपक जला लें। ये दीपक साधनाकाल तक जलते रहने चाहिए। दीपक के सामने लाल चावल (चावल को रंग लें) की एक ढेरी बनाएं फिर उस पर एक श्रीयंत्र रखकर उसका कुंकुम, फूल, धूप, तथा दीप से पूजन करें। उसके बाद एक प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसे अपने सामने रखकर उसका पूजन करें। श्रीयंत्र को अपने पूजा स्थल पर स्थापित कर लें और शेष सामग्री को नदी में प्रवाहित कर दें। इस प्रयोग से आपको अचानक धन लाभ होने के योग बन सकते हैं।

3. शीघ्र विवाह के लिए उपाय

पुरुषार्थ-चतुष्टय-लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।।'