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‘400 KM तक बाड़बंदी कंप्लीट’, मेघालय वाले साइड से भी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर को सील करने का काम तेज

meghalaya border fencing: मेघालय में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम तेजी से पूरा हो रहा है। मुख्यमंत्री कॉनराड सांगमा ने बताया कि 400 किलोमीटर तक बाड़ लगाया जा चुका है।
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भारत

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Mukul Kumar

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Updated: 27 May 2026, 9:21 PM IST

India Bangladesh Border

भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी। (फोटो- IANS)

पश्चिम बंगाल के बाद मेघालय वाले साइड से भी भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बाड़बंदी का काम तेज है। मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के सांगमा ने कहा है कि राज्य में बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा दीवार का काम लगभग पूरा हो चुका है।

उन्होंने आगे बताया कि कुल 440 किलोमीटर में से करीब 400 किलोमीटर बाड़ लग गई है। सिर्फ 40-45 किलोमीटर बचा है, यानी महज 10 फीसदी काम बाकी है।

क्यों हो रही देरी?

वहीं, सीमा पर बाड़बंदी के काम में क्यों देर हो रही है? इस पर पूछे जाने पर सीएम ने कहा कि स्थानीय लोगों की कुछ समस्याओं के कारण यह देरी हुई है, लेकिन सरकार उन मुद्दों को सुलझाने में जुटी हुई है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि दूसरे राज्यों की तुलना में मेघालय काफी आगे है। कई जगहों पर पहाड़ी इलाके, नदियां और गांवों की वजह से काम रुक जाता है, लेकिन यहां स्थानीय लोगों से बातचीत कर रास्ता निकाला जा रहा है।

क्यों बाड़ लगाना जरूरी?

सुरक्षा के लिहाज से भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने की मांग लंबे समय हो रही है। घुसपैठ, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियां रोकने के लिए यह दीवार बहुत अहम है। मेघालय में लंबी सीमा है, जहां जंगल और पहाड़ी इलाके हैं। ऐसे में काम आसान नहीं था।

फिर भी राज्य सरकार और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल से प्रगति हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया- हम स्थानीय लोगों की समस्याओं को समझ रहे हैं। उनकी जमीन, खेती और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े मुद्दों पर बात हो रही है। जल्द ही बाकी काम भी पूरा कर लिया जाएगा।

क्या है स्थानीय लोगों की परेशानी

सीमा इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर चिंतित रहते हैं। उन्हें डर होता है कि बाड़ लगने से उनकी खेती-बाड़ी और आवाजाही पर असर पड़ेगा।

कुछ गांव ऐसे हैं जहां बाड़ के रास्ते में घर आ रहे थे। सरकार ने इन मामलों में संवाद बढ़ाया है। कई जगहों पर वैकल्पिक रास्ते और जरूरी मदद का वादा किया गया है।

मेघालय में यह काम दूसरे राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल या असम की तुलना में बेहतर गति से चल रहा है। वहां अभी भी बड़े-बड़े हिस्से बाकी हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि टीम वर्क और लोकल सहयोग से यह मुमकिन हुआ है।

क्या है आगे का प्लान?

बाकी बचे 40-45 किलोमीटर में काम जल्द शुरू होने वाला है। अधिकारी लगातार लोकल नेताओं और गांव वालों से मिल रहे हैं। अगर सब ठीक रहा तो इस साल के अंत तक पूरा काम निपट सकता है।

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