
इस एक एकादशी को करने से चौबीस एकादशियों का फल अपने आप मिल जाता हैं
पूरे साल भर में पड़ने वाली सभी चौबीस एकादशियों में से ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता और शास्त्रों में इसको सबसे अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है । उपवास के कठोर नियमों के कारण निर्जला एकादशी को सबसे कठिन माना जाता है । जो लोग निर्जला एकादशी व्रत करते है वे श्रद्धालु भोजन ही नहीं बल्कि दिन भर पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करते । इस दिन व्रती अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं ।
निर्जला एकादशी के लाभ
अगर कोई श्रद्धालु साल भर में पड़ने वाली सभी चौबीस एकादशियों का उपवास नहीं कर सकते, तो उन्हें केवल एक निर्जला एकादशी का उपवास कर लेने से दूसरी सभी एकादशियों का लाभ अपने आप मिल जाता हैं । कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से कई जन्मों के पापों का नाश भी हो जाता है ।
शुभ मुहूर्त
निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त
- 23 जून 2018 को सुबह 03:19 बजे से आरंभ होकर, 24 जून 2018 को दोपहर 03:52 बजे तक रहेगी ।
व्रत तोड़ने का शुभ मुहूर्त
24 जून 2018 को दोपहर 1:59 से शाम 04:30 के बीच तक रहेगा ।
पारण तिथि के दिन हरिवास समाप्त होने का समय- सुबह 10:08 होगा ।
व्रत के नियम
- निर्जला एकादशी के दिन सूर्योदय से 2 घंटे पहले से ही यह व्रत आरंभ हो जाता है।
- इसलिए इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करने के बाद संकल्प लेकर व्रत प्रारंभ कर देना चाहिए ।
- इस दिन भगवान श्री विष्णु की विशेष आराधना करनी चाहिए ।
- इस दिन आलस्य, ईर्ष्या, झूठ व बुराई जैसे पाप नहीं करने चाहिए ।
- किसी का भी दिल नहीं दुखाना चाहिए ।
- इस दिन माता-पिता और गुरु का चरण स्पर्श कर आर्शीवाद लेना चाहिए ।
- इस दिन श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ अवश्य करना चाहिए ।
- पूरे दिन बिना कुछ खाये उपवास रहना चाहिए ।
- भोजन ही नहीं बल्कि दिन भर पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करनी चाहिए ।
इस मंत्र का करें जप
इस व्रत को विष्णु भगवान का सबसे प्रिय वृत बताया गया है, निर्जला एकादशी को पूरे दिन- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र कम से कम 1100 बार का जप करना चाहिए ।
Updated on:
22 Jun 2018 02:15 pm
Published on:
22 Jun 2018 01:28 pm
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