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नक्सलमुक्ति की तरह अब देश में ड्रग कार्टेल खत्म करने की तैयारी

केंद्रीय गृह मंत्रालय के 'नक्सलमुक्त भारत' अभियान की सफलता के बाद केंद्र सरकार की इसी तर्ज पर अब देश में मादक पदार्थों की तस्करी और ड्रग कार्टेल खत्म करने की तैयारी है। जानकार सूत्रों के अनुसार नशामुक्त भारत के मिशन के तहत नार्काेटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) तथा अन्य केंद्रीय व राज्य एजेंसियां मिलकर भारत के बाहर से मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए ड्रग कार्टेल्स और सिंडिकेट को निशाने पर लेंगी वहीं देश में भी आंतरिक डिलीवरी वाले गिरोहों की गतिविधियों पर सख्ती से लगा लगाएंगी।

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सांकेतिक AI इमेज

अभिषेक सिंघल

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय के 'नक्सलमुक्त भारत' अभियान की सफलता के बाद केंद्र सरकार की इसी तर्ज पर अब देश में मादक पदार्थों की तस्करी और ड्रग कार्टेल खत्म करने की तैयारी है। जानकार सूत्रों के अनुसार नशामुक्त भारत के मिशन के तहत नार्काेटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) तथा अन्य केंद्रीय व राज्य एजेंसियां मिलकर भारत के बाहर से मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए ड्रग कार्टेल्स और सिंडिकेट को निशाने पर लेंगी वहीं देश में भी आंतरिक डिलीवरी वाले गिरोहों की गतिविधियों पर सख्ती से लगा लगाएंगी। कार्टेल तोड़ने के लिए सरकार डार्कनेट, क्रिप्टोकरंसी के साथ एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कड़ी नजर रख रही है वहीं राज्यों को नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त गिरोहों और ड्रग सिंडिकेट पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार सरकार विशेष तौर पर मैक्सिको, कनाडा की तर्ज पर देश में सक्रिय हो रहे ड्रग कार्टेल पर शिकंजा कसेगी। गृह मंत्रालय ने पिछले दिनों जम्मू कश्मीर और पंजाब की बैठकों में ड्रोन से तस्करी रोकने के प्रभावी उपाय करने को कहा है वहीं मध्यप्रदेश जेसीसी की मीटिंग के दौरान एनसीबी ने ड्रग सिंडिकेट और अवैध रूप से चल रही ड्रग लैब व सिंथेटिक ड्रग नेटवर्क पर विशेष ध्यान देने को कहा है।

डेथ क्रीसेंट, डेथ ट्राइंगल और अफ्रीकी नेटवर्क

तीन बड़े सप्लाई रूट, इंटरनेशनल कार्टेल व स्थानीय गिरोहों की मिलीभगत

भारत में ड्रग्स की सप्लाई मुख्यतया तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ी है जो भारत में माल पहुंचा कर स्थानीय गिरोहों के माध्यम से ग्राहक तक डिलीवरी करते हैं।

1.डेथ क्रिसेंट नेटवर्क अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रास्ते भारत में हेरोइन की सप्लाई करता है। ड्रोन, समुद्री मार्ग, नदी-नाले, थार मरुस्थल के जरिये भारत में मादक पदार्थ आते हैं। गुजरात, राजस्थान, पंजाब और जम्मू कश्मीर में ड्रोन ड्रॉप से तस्करी।

2.डेथ ट्राइंगल नेटवर्क म्यांमार-लाओस-थाईलैंड के जरिए सिंथेटिक ड्रग्स भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचाता है। जंगल के रास्तों से म्यांमार से खुली तस्करी, मणिपुर में स्थानीय स्तर पर संरक्षित खेती के भी मामले।

3. अफ्रीकी सिंडिकेट नेटवर्क मुंबई, दिल्ली, बेंगलूरु जैसे मेट्रो शहरों में हाईप्रोफाइल ग्राहकों की सप्लाई के लिए समुद्री मार्ग या एयर कार्गाें के जरिये माल पहुंचाता है।

4. मैक्सिको-चीन ड्रग रूट में भारत ट्रांजिट स्पॉट है जिसमें सिंथेटिक केमिकल हिंद महासागर के जरिये भारत आता है। मैक्सिकन ड्रग लॉर्ड ‘अल मुंचो’ के जेएनजीसी कार्टेल के चाइनीज एवं कनाडियन गैंस्टर सै ची लॉप के गिरोह ‘द कम्पनी’ के साथ गठजोड़ से इसमें तेजी आई। हालांकि मुंचो की मौत के बाद यह नेटवर्क कमजोर हो सकता है। दो साल पहले भारत में एक मैक्सिकन नागरिक पकड़ा गया था।

कोट:

'हम ड्रग रैकेटों की सांस लेने की हर एक जगह बंद करने के लिए अपनी पूरी ताकत के साथ संकल्पबद्ध हैं। -अमित शाह, गृह मंत्री ( पिछले दिनों एक्स पोस्ट में कहा)

ये राज्य बने हॉटस्पॉट

पंजाब:- हेरोइन की खपत और सीमा पार तस्करी का बड़ा केंद्र

गुजरात:- समुद्री रास्ते से ड्रग्स की एंट्री व वितरण का जाल

महाराष्ट्र, कर्नाटक:- उपभोग और ट्रांजिट हब

दिल्ली-एनसीआर:- वितरण नेटवर्क का प्रमुख केंद्र

पूर्वोत्तर राज्य:- म्यांमार रूट से आने वाले ड्रग्स का प्रवेश द्वार

राजस्थान:- सीमा पार तस्करी का महत्वपूर्ण मार्ग

तस्करी वही, नेटवर्किंग, सप्लाई, पेमेंट के तरीके बदले पारंपरिक तरीके

तस्करी- सीमा पार घुसपैठ, ड्रोन, समुद्री मार्ग, ट्रक और रेल नेटवर्क,

आधुनिक तरीके: तस्करी- डार्कनेट, सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड ऐप्स से संपर्क कर पारंपरिक तरीकों से तस्करी

डिलीवरी सिस्टम:

पारंपरिक: गाडि़यों में छिपा कर परिवहन, मैन्युअल व कोडिंग के जरिये डिलीवरी

आधुनिक: कूरियर और पार्सल सेवाओं के जरिए डोरस्टेप डिलीवरी

भुगतान: पारंपरिक - हवाला से लेनदेन

आधुनिक - बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी

संपर्क/नेटवर्क

पारंपरिक - मैन्युअल, कोडनेम, कोडवर्ड

आधुनिक - टेलीग्राम व अन्य ऐप्स, बी2बी प्लेटफार्म, छद्म कॉल सेंटर के जरिए बातचीत।

एजेंसियां करेंगी इन उपायों से सख्ती

-अन्तरराष्ट्रीय कार्टेल के भारतीय सम्पर्कों पर निगरानी

-साइबर सर्विलांस और डेटा एनालिसिस

-कॉल डिटेल और वित्तीय लेनदेन की निगरानी

-मुखबिर नेटवर्क और अंडरकवर ऑपरेशन

- एजेंसियों का जॉइंट एक्शन

फैक्ट फाइल

-वर्ष 2025: एनसीबी ने 1980 करोड़ से ज्यादा कीमत के 1.33 लाख किलो नशीले पदार्थ जब्त किए

-3889 करोड़ से ज्यादा कीमत के 77 हजार किलो से ज्यादा नशीले पदार्थ नष्ट

-वर्ष 2024: 13306 क्विंटल नशीले पदार्थ जब्त

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बढ़ती ड्रग तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए एनसीबी ऑपरेशन वाइप ( वेब बेस्ड इल्लिसिट एक्टिविटी प्रिवेंशन एंड एन्फोर्समेंट ) शुरू किया है। ऑपरेशन मेडमेक्स के बाद से एनसीबी सरफेस वेब की निगरानी कर रहा है इन्टरनेशनल नार्कोटिक्स कंट्रोल बोर्ड के स्नूप प्रोग्राम से भी खुफिया इनपुट मिल रहा है।

एनसीबी जोनल डायरेक्टर्स की प्रथम तिमाही जोनल डायरेक्टर्स कॉन्फ्रेंस 2026 के पहले दिन सोमवार को देशभर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक मजबूत और समन्वित रणनीति अपनाने का संकल्प लिया गया। अधिकारियों ने आगामी तीन वर्षों के लिए ‘नेटवर्क-सेंट्रिक अप्रोच’ पर काम करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि ड्रग तस्करी के जाल को प्रभावी ढंग से तोड़ा जा सके।