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‘मेरी मम्मी कब आएंगी…’ रो-रोकर बार-बार पूछ रहा तनिष्क, कैसे बताएं- नहीं आएंगी

Jabalpur Boat Accident: इस दर्द भरे हादसे में अपनी आंखों से देखने वाले चश्मदीदों जो मंजर बताया वो बहुत भयानक था। इस हादसे के बाद 10 साल की तनिष्का बार-बार यही पूछ रहा है कि मम्मी कब आएंगी ?

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Jabalpur Boat Accident

Jabalpur Boat Accident (Photo Source - Patrika)

Jabalpur Boat Accident: जबलपुर शहर में तूफानी हवा और पानी की तेज लहरों में फंसकर गुरुवार शाम करीब 5.45 बजे बरगी डैम के बैक वॉटर में संचालित मैकल क्रूज चंद पलों में डूब गया। इसमें कुल 34 लोग सवार थे। अब तक इस हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। 28 लोगों को बचा लिया गया है। वहीं 4 लोग अभी भी लापता है। बताया जा रहा है कि हादसे के वक्त क्रूज में लगभग 43 से 47 पर्यटक सवार थे। टिकट सिर्फ 29 लोगों की कटी थी। इस दर्द भरे हादसे में अपनी आंखों से देखने वाले चश्मदीदों जो मंजर बताया वो बहुत भयानक था। इस हादसे के बाद 10 साल का तनिष्क बार-बार यही पूछ रहा है कि मम्मी कब आएंगी ?

जैसे ही कोई भी तनिष्क से मिलने आता है तो तनिष्क यही सवाल बार-बार पूछ रहा है मम्मी कब आएंगी ? वो बार-बार यही उम्मीद लगा रहा है कि मम्मी आएंगी लेकिन पास खड़े लोगों में इतनी हिम्मत नहीं बची है कि वे बता पाए कि इस सवाल का जवाब हमारे पास भी नहीं है। थोड़ी थोड़ी देर में रोने वाले तनिष्क को उसकी बड़ी बहन तनिष्का समझाती है। वो बार-बार कहती है कि मम्मी आ जाएंगी लेकिन हकीकत उसे भी मालूम है। जबलपुर क्रूज हादसे ने इस परिवार से सिर्फ एक सदस्य नहीं छीना, बल्कि बचपन की मासूमियत, भरोसा और सुकून भी छीन लिया। अब तक इस हादसे में नौ लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग घायल है।

यादगार दिन बना मनहूस दिन

इस हादसे के बारे में 42 साल के मनोज श्रीवास बताते है कि वे अपने परिवार के साथ एक यादगार दिन मनाने आए थे लेकिन उन्हें नहीं पता था कि ये दिन ही उनके जीवन का मनहूस दिन हन जाएगा। उन्होंने पत्नी, छोटे भाई और तीन बच्चों के साथ बरगी डैम में क्रूज राइड का प्लान बनाया। बच्चों को भी मजा आ रहा था। तनिष्का ने बताया कि शुरुआत में सब कुछ सामान्य था हम लोग फोटो खींच रहे थे। मम्मी-पापा भी बहुत खुश थे लेकिन अचानक से मौसम बदलने लगा। हवा तेज होने लगी थी लेकिन क्रूज चलता रहा। हमें लाइफ जैकेट तब दी गई जब हालत बिगड़ने लगी। कुछ ही मिनटों में हालात बेकाबू हो गए। तेज हवाओं के कारण लहरें ऊंची उठने लगीं और अचानक क्रूज डगमगाने लगा।

आगे का मजर बताते हुए वो सहम जाती है। वह बताती है कि यह सब इतना तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। और अचानक से क्रूज पलट गया। सब लोग इधर-उधर हो गए, हर तरफ चीख-पुकार मच गई। कोई अपने बच्चों को पकड़ रहा था, कोई माता-पिता को ढूंढ रहा था। पापा, चाचा और छोटा भाई एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए थे, इसलिए वो अलग नहीं हुए लेकिन मैं, मेरी बहन और मम्मी बिछड़ गए। मां कहीं नहीं थीं।

90 पर्यटकों की क्षमता

जबलपुर शहर से 40 किमी दूर बरगी बांध में दो दशक से क्रूज का संचालन हो रहा है। इसे नर्मदा क्वीन नाम दिया गया है। क्षमता 90 पर्यटकों की है। ऐसे में भले ही ओवरलोडिंग घटना की वजह नहीं हो, लेकिन कहीं न कहीं मौसम के पूर्वानुमान की अनदेखी और पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं करवाना इसका कारण हो सकता है।

ये हैं सुलगते सवाल

  • क्या क्रूज का वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र था। अंतिम बार जांच कब हुई ?
  • क्या सभी यात्रियों ने लाइफ जैकेट पहनी थी। क्योंकि अक्सर क्रूज पर लोग जैकेट उतार देते हैं ?
  • क्या मौसम विभाग की आंधी की चेतावनी के बावजूद क्रूज को पानी में ले जाने की अनुमति दी गई ?
  • इतने बड़े जलक्षेत्र की तुलना में प्रशिक्षित गोताखोरों और लाइफ गार्ड्स की संख्या हमेशा कम रही है। घटना के समय कितने लाइफ गार्ड्स थे ?