देवर्षि नारद जयंती के उपलक्ष्य में विश्व संवाद केंद्र मालवा द्वारा परिचर्चा, संगोष्ठी का आयोजन गुरुवार शाम 6.30 बजे गौरीकुंज सभागृह में किया गया। ऑपरेशन सिंदूर : भारत का सामथ्र्य विषय पर में मुख्य वक्ता सेवानिवृत्त कर्नल अनुराग शुक्ला ने भारत की तीनों सेनाओं की एकजुटता, सटीक रणनीति और देशवासियों के अटूट विश्वास को देश की ताकत बताया।
ऑपरेशन सिंदूर ने फेरा बाहरी ताकतों के मंसूबों पर पानी
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य क्षमता का एक ज्वलंत उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि जब देश की सेना और जनमानस एक साथ खड़े होते हैं, तो कोई भी बाहरी शक्ति भारत को डगमगा नहीं सकती। कर्नल शुक्ला ने बताया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत में आंतरिक अस्थिरता लाना चाहती थीं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तो मात्र एक चेहरा है, असली दुश्मन वे शक्तियां हैं जो पर्दे के पीछे से भारत को कमजोर करना चाहती हैं। ऐसे में हमें एकजुट होकर न केवल सैन्य मोर्चे पर, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और तकनीकी मोर्चों पर भी सतर्क रहना होगा।
स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो सेना की जानकारी
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश की नई पीढ़ी को सेना के योगदान और बलिदानों के बारे में जानना आवश्यक है। इसके लिए स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में भारतीय सेना से जुड़ी जानकारी शामिल की जानी चाहिए, ताकि बच्चों में देशभक्ति की भावना और सुरक्षा के प्रति समझ विकसित हो। कर्नल शुक्ला ने भविष्य की युद्ध शैली पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि अब युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाएंगे, बल्कि तकनीकी दक्षता, सूचना युद्ध, साइबर सुरक्षा और कूटनीतिक चतुराई से ही विजय संभव होगी। कार्यक्रम में मीडिया इंफ्लुएंसर, युवाओं, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। संचालन सुधीर देशपांडे ने किया। विषय की प्रस्तावना नीलेश माहूलीकर ने रखी एवं विश्व संवाद केंद्र मालवा की ओर से आभार सुमित जैन ने माना।