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धान की फसल में बारिश के बाद न करें ये गलती: जलभराव से बचाव और ज्यादा उपज के लिए अपनाएं ये उपाय

Paddy Crop Rain Care Waterlogging : धान की फसल में भारी बारिश के बाद जलभराव से बचाव, जल निकासी, उर्वरक प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय। जानें ज्यादा उपज के लिए क्या करें।
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Paddy Crop Rain Care Waterlogging

Paddy Crop Rain Care Waterlogging : बारिश के मौसम में धान की उपज कैसे बढ़ाएं, PC- Chatgpt

बारिश धान की फसल के लिए जरूरी पानी उपलब्ध कराती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी खेत में लंबे समय तक जमा रह जाए तो नुकसान भी हो सकता है। खासकर लगातार बारिश के बाद जलभराव से जड़ों की स्थिति प्रभावित होती है और रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बारिश के बाद खेत में पानी का सही प्रबंधन, फसल की निगरानी और जरूरत के अनुसार पोषक तत्व देना बेहद जरूरी है। ICAR भी धान वाले क्षेत्रों में उचित जल निकासी और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन की सलाह देता है।

सबसे पहले खेत से अतिरिक्त पानी निकालें

बारिश रुकने के बाद सबसे पहले खेत की स्थिति देखें। जहां पानी जरूरत से ज्यादा जमा है, वहां निकासी की व्यवस्था करें। खेत की नालियां और निकास मार्ग खुले रखें, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।

लंबे समय तक जलभराव धान की वृद्धि और जड़ों के आसपास की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। ICAR के अनुसार जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी ड्रेनेज और पानी प्रबंधन फसल बचाने के लिए महत्वपूर्ण है।

खेत में जल निकासी की व्यवस्था रखें

यदि किसी हिस्से में बार-बार पानी जमा होता है तो खेत की सतह और ढाल को ध्यान में रखते हुए छोटी निकासी नालियां बनाई जा सकती हैं। खेत की मेड़ों और मुख्य निकास मार्ग को भी साफ रखें।

हालांकि हर धान के खेत में पानी पूरी तरह निकाल देना जरूरी नहीं है। फसल की अवस्था और खेती की पद्धति के अनुसार खेत में उचित नमी बनाए रखना जरूरी है। ICAR की सलाह में भी धान में पानी प्रबंधन को फसल की अवस्था के अनुसार करने पर जोर दिया गया है।

फसल गिर गई है तो जल्दबाजी न करें

तेज हवा और बारिश के कारण धान के पौधे गिर सकते हैं। ऐसी स्थिति में खेत में पानी की स्थिति और फसल की अवस्था पहले देखें। बहुत ज्यादा पानी होने पर पहले जल निकासी करें।

हर गिरी हुई फसल को हाथ से बांधकर सीधा करना जरूरी या व्यावहारिक नहीं है। बड़े क्षेत्र में ऐसा करने से श्रम और पौधों को अतिरिक्त नुकसान हो सकता है। इसलिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही हस्तक्षेप करें।

बारिश के तुरंत बाद खाद न डालें

भारी बारिश के तुरंत बाद खेत में उर्वरक डालने या पत्तियों पर घोल का छिड़काव करने से पहले खेत की स्थिति देखें। पानी भरे खेत में बिना जरूरत खाद डालना पोषक तत्वों के नुकसान का कारण बन सकता है।

नाइट्रोजन की पूरी मात्रा एक साथ देने के बजाय फसल की जरूरत के अनुसार विभाजित मात्रा में देने की सलाह दी जाती है। फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा भी मिट्टी जांच तथा स्थानीय कृषि सिफारिश के आधार पर तय करनी चाहिए। ICAR की धान संबंधी सलाह में नाइट्रोजन को विभाजित मात्रा में देने पर जोर दिया गया है।

बारिश के बाद हर खेत में एक जैसी मात्रा में MOP या यूरिया डालना सही तरीका नहीं है। पोषक तत्व की कमी और फसल की अवस्था देखकर ही निर्णय लें।

कीट और रोग पर नजर रखें

लगातार बारिश और अधिक नमी के बाद धान में रोग और कीटों की समस्या बढ़ सकती है। खेत में नियमित निरीक्षण करें और पत्तियों, तनों तथा पौधों की वृद्धि पर नजर रखें।

किसी रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर बिना पहचान के कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव न करें। कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से समस्या की पहचान कराकर ही अनुशंसित दवा और मात्रा का इस्तेमाल करें। ICAR भी धान में रोग और कीट की निगरानी तथा आवश्यकता के अनुसार उपचार की सलाह देता है।

गायब पौधों और मिट्टी की स्थिति देखें

बारिश और तेज बहाव के बाद खेत का निरीक्षण करें। कहीं पौधे बह तो नहीं गए, मिट्टी जमा तो नहीं हुई या पौधों की कतारों में खाली जगह तो नहीं बन गई—इन सभी बातों की जांच करें।

यदि फसल की अवस्था और मौसम की अवधि इसकी अनुमति देती है, तो खाली जगहों को स्वस्थ पौधों से भरने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह ली जा सकती है। बहुत देर से दोबारा रोपाई करने पर फसल की परिपक्वता प्रभावित हो सकती है।

देर से रोपाई हो तो किस्म का चुनाव महत्वपूर्ण

जहां भारी बारिश के कारण धान की रोपाई में देरी हुई है, वहां क्षेत्र और मौसम के अनुसार कम या मध्यम अवधि वाली उपयुक्त किस्मों का चयन उपयोगी हो सकता है। ICAR की कृषि सलाह में भी रोपाई की उम्र और फसल की अवधि के अनुसार किस्मों का चयन करने पर जोर दिया गया है। सामान्य परिस्थितियों में 20–25 दिन पुराने पौधों की रोपाई की सलाह कई क्षेत्रों में दी जाती है, लेकिन स्थानीय सिफारिश को प्राथमिकता देनी चाहिए।

बारिश से पहले, दौरान और बाद में क्या करें?

समयक्या करें
बारिश से पहलेनालियां और निकास मार्ग साफ रखें
बारिश के दौरानखेत में अनावश्यक प्रवेश और छिड़काव से बचें
बारिश के बादअतिरिक्त पानी की निकासी करें
जलभरावखेत की स्थिति और फसल की अवस्था देखें
उर्वरकमिट्टी जांच व फसल की जरूरत के अनुसार दें
रोग-कीटनियमित निगरानी करें
रोपाई में देरीस्थानीय सलाह से उपयुक्त अवधि वाली किस्म चुनें

वैज्ञानिक सलाह को प्राथमिकता दें

भारी बारिश और जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियां बहुत अलग हो सकती हैं। मिट्टी का प्रकार, खेत की ऊंचाई, जल निकासी, फसल की उम्र और धान की किस्म—इन सभी के आधार पर सलाह बदल सकती है।

ICAR ने जलभराव वाले और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में खेत की मेड़ मजबूत करने, भूमि समतलीकरण और प्रभावी जल निकासी अपनाने पर जोर दिया है। बिहार के पूर्वी चंपारण में 2026 के ICAR कार्यक्रम में भी किसानों को जलभराव और बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए ड्रेनेज, भूमि प्रबंधन और संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह दी गई।

किसान के लिए सबसे जरूरी बात

बारिश के बाद धान के खेत में “पानी है तो फायदा ही होगा” वाली सोच सही नहीं है। धान को पानी की जरूरत जरूर होती है, लेकिन लंबे समय तक अनियंत्रित जलभराव नुकसान पहुंचा सकता है। दूसरी तरफ, बिना जरूरत पूरा पानी निकाल देना भी सही नहीं है।

इसलिए लक्ष्य होना चाहिए-अतिरिक्त पानी की निकासी, पर्याप्त नमी का संरक्षण और फसल की अवस्था के अनुसार पोषक तत्व प्रबंधन।