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अमरीका के चलते चेन्नई एयरपोर्ट पर घंटो अटके रहे यात्री, जानें क्या है वजह

Chennai Airport

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Chennai Airport

चेन्नई. आने वाले समय में भारत न केवल जापान और जर्मनी बल्कि अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की क्षमता रखता है लेकिन आज भी भारत दूसरे देशों पर निर्भर है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी होने के बावजूद हम अमरीकी व्यवस्था पर निर्भर है जिसका खामियाजा शुक्रवार को भुगतना पड़ा। माइक्रोसॉफ्ट पर निर्भता कम करनी होगी और अपना इन-लाइन सॉफ्टवेयर तैयार रखना होगा। ताकि एयरपोर्ट, बैकिंग सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की चाल धीमी न पड़ जाए।

अब्दुल कलाम को याद किया
विशेषज्ञों ने ऐसे मौके पर देश के मिसाइल मैन एपीजे अब्दूल कलाम को याद करते हुए उनके द्वारा पेश किया गया स्वदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम बॉस (भारत ऑपेरटिंग सिस्टम सॉल्यूशन) की जानकारी दी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में (विशेषकर सरकारी कार्यालयों में) माइक्रोसॉफ्ट विंडोज जैसे विदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम से निर्भरता को समाप्त करना है। अभ वक्त आ गया है जब हमें दूसरे देशों पर निर्भरता कम कर दें।

आईटी कंपनियों पर ज्यादा असर नहीं
जोहो के एक कर्मचारी ने बताया कि उनके सिस्टम में माइक्रोसॉफ्ट विडोंज नहीं चलते है। इसलिए उनके कामकाज पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। हालांकि प्रबंधन की ओर से कहा है कि कंप्यूटरों की स्क्रीन ब्लू हो जाने पर रीबूट करें। उन्होंने समस्या का समाधान होने से तक कर्मचारियों से अपना कंप्यूटर बंद रखने के लिए कहा है।

क्या-क्या हुआ प्रभावित

फ्लाइट्स प्रभावित, टिकट बुकिंग बंद
फैक्टियों में भी नहीं चल रहीं मशीनें
ऑनलाइन पेमेंट पर भी पड़ा असर
कई बैंकों की एटीएम सेवाएं प्रभावित

इनका कहना है-
दूसरे देशों पर निर्भरता कम कर देनी चाहिए। हमें अपने देश के लिए अपना सॉफ्टवेयर उपयोग में लेना चाहिए ताकि ऐसी नौबत न आए।

वी, राजेन्द्रन
चेयरमैन, डिजीटल सेक्युरिटी एसोसिएशन ऑफ इंडिया

माइक्रोसॉफ्ट के सर्वर में गड़बड़ी के कारण एयरपोर्ट, बैंक और स्टॉक एक्सचेंज से लेकर न्यूज चैनल तक प्रभावित हुए है। दुनियाभर में एयरलाइंस के सर्वर में खराबी का असर देखने को मिला है। भारत सहित कई देशों में विमान सेवाएं प्रभावित हुई है। कई कंपनियों के विमान उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। स्पाइसजेट और इंडिगों ने भी इसी तरह की तकनीकी समस्या का हवाला दिया है। सिर्फ विमान सेवाएं ही नहीं बल्कि कई देशों में बैंकिंग सेवाओं से लेकर टिकट बुकिंग और स्टॉक एक्सचेंज पर भी असर देखने को मिल रहा है।