इंदौर. अयोध्या में राम मंदिर की स्थापना की द्वादशी को अब प्रतिष्ठा द्वादशी कहना। अनेक शतकों से परिचक्र झेलने वाले भारत की सच्ची स्वतंत्रता की प्रतिष्ठा उस दिन हो गई। भारत के स्व में राम, कृष्ण और शिव हैं। एक विशेष दृष्टि से भारत का संविधान भी स्व से बना है लेकिन उस भाव से चला नहीं। उनकी पूजा करने वाले और उनकी पूजा न करने वाले सब पर लागू हैं। पूजा पद्घति बदल गई लेकिन हमारा स्व वही हैं।
ये बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने इंदौर के लता मंगेशकर ऑडिटोरियम में आयोजित देवी अहिल्या देवी अहिल्या राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में कही। इस वर्ष ये पुरस्कार अयोध्या में राम मंदिर संघर्ष में अपनी महती भूमिका निभाने वालों के प्रतिनिधि के तौर पर तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय को दिया गया। भागवत का कहना था कि लिखित रूप में संविधान हमने पाया है लेकिन अपने मन की नींव पर उसको स्थापित नहीं कर पाए।