
शनि हुए वक्री, चार माह से अधिक समय तक चलेंगे उल्टी चाल, जानिये इसका आप पर असर!...
भोपाल। न्याय के देवता शनिदेव बुधवार को धनु राशि में वक्री हो गए। शनिदेव एक राशि में करीब ढाई साल तक रहते हैं। शनि धनु राशि में चार माह से अधिक समय तक वक्री रहेंगे और 17 सितंबर को मार्गी होंगे।
इससे शनि से प्रभावित राशियां जिन पर साढ़े साती और अढ़ैया का प्रभाव चल रहा है, उन जातकों की साढ़े साती और अढ़ैया की अवधि भी चार माह से अधिक बढ़ जाएगी।
वृश्चिक, धनु, मकर पर साढ़े साती का प्रभाव बढ़ेगा...
ज्योतिष मठ संस्थान के पंडित विनोद गौतम ने बताया कि शनि 26 अंश पर वक्री हुआ है और 19 अंश तक जाएगा। यह 17 सितम्बर को मार्गी होंगे और धनु राशि में शनि की अवधि 30 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी।
शनि के वक्री होने से वृश्चिक, धनु और मकर राशि पर साढ़े साती का प्रभाव बढ़ेगा। वाहन भय, मान सम्मान में कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
वृष और कन्या राशि में अढ़ैया : इसी प्रकार वृष और कन्या राशि में अढ़ैया शनि के कारण स्वास्थ्य में खराबी, पारिवारिक मतभेद जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा।
अर्थव्यवस्था गड़बड़ाएगी, महंगाई बढ़ेगी
ज्योतिषाचार्य अंजना गुप्ता ने बताया कि शनि के वक्री होने का सबसे अधिक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और अर्थव्यवस्था गड़बड़ाएगी। महंगाई बढ़ेगी, खासकर तेलों के दामों में उछाल आएगा।
शनि गुरु की राशि धनु में वक्री हुआ है और गुरु स्वयं वक्री चल रहे हैं। इस स्थिति में कई तरह की परेशानियों का सामना लोगों को करना होगा। जो शनि पीडि़त है वे शांति के लिए अधिक से अधिक मेहनत करे, खूब पानी पीएं।
इन राशियों के लिए होगा फलदायी
शनि के वक्री होने से मेष, मिथुन, सिंह, कर्क और तुला राशि के लिए यह सामान्य फलदायी होगा, जबकि कुंभ और मीन राशि के लिए सम्मुख शनि प्रकोपकारी रहेगा। शनि के वक्री होने से न्याय व्यवस्था में कसावट आएगी।
न्याय संगत कार्य करने वालों को सफलता मिलेगी
पं. विष्णु राजौरिया ने बताया कि शनि के वक्री होने का प्रभाव प्राकृतिक, आर्थिक, धार्मिक, राजनीतिक सहित कई क्षेत्रों में दिखाई देगा। शनि को न्याय का देवता माना जाता है। शनि गुरु की राशि में वक्री हो रहा है।
इससे प्राकृतिक रूप से भी इसका असर होगा। आंधी, तूफान, ओलावृष्टि जैसी स्थिति बनेगी। इसी तरह न्याय संगत कार्य करने वालों को सफलता मिलेगी। शनि एक राशि में ढाई साल तक रहता है और एक साथ पांच राशियों को प्रभावित करता है। इसमें तीन राशियों पर साढ़े सात वर्ष और दो राशियों पर ढाई वर्ष तक इसका प्रभाव रहता है।
शनि का वैदिक मंत्र
ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शं योरभि स्त्रवन्तु न:।।
शनि का तांत्रिक मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः।।
शनि का बीज मंत्र
ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
शनि के अन्य राशियों व नक्षत्रों से संबंध-
शनि मकर और कुंभ राशि का स्वामी होता है। तुला राशि शनि की उच्च राशि है जबकि मेष इसकी नीच राशि मानी जाती है। शनि पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी होता है।
शनि का गोचर एक राशि में ढ़ाई वर्ष तक रहता है। ज्योतिषीय भाषा में इसे शनि ढैय्या कहते हैं। नौ ग्रहों में शनि की गति सबसे मंद है।
Published on:
01 May 2019 03:22 pm
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