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वैज्ञानिकों ने पता लगाया ग्रीनलैंड से अंटार्कटिका तक 9 दिन तक क्यों धूजती रही धरती

इस भूकंपीय तरंग की गति इतनी तेज थी कि यह एक घंटे से भी कम समय में उत्तरी गोलाद्र्ध में ग्रीनलैंड से दक्षिणी गोलाद्र्ध पर अंटार्कटिका तक पहुंच गई।

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लंदन . वैज्ञानिकों ने पिछले वर्ष सितंबर में 9 दिन तक धरती में महसूस की गई असामान्य तरंगों के स्रोत का पता लगा लिया है। इस भूकंपीय तरंग की गति इतनी तेज थी कि यह एक घंटे से भी कम समय में उत्तरी गोलाद्र्ध में ग्रीनलैंड से दक्षिणी गोलाद्र्ध पर अंटार्कटिका तक पहुंच गई। यह तरंगें भूकंप के झटके से उत्पन्न तरंगों से बिल्कुल अलग थीं, यह लंबी तरंगें थी और हर 90 सेकंड में महसूस हो रही थी। जहां आमतौर पर भूकंप की तरंगें कुछ देर के लिए महसूस होती है, वहां यह तरंगें लगातार 9 दिन तक दुनियाभर में पृथ्वी पर कंपन पैदा करती रही।

विशाल भूस्खलन से पैदा हुई तरंगें
वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रीनलैंड के फजोर्ड में हुए भूस्खलन के कारण पैदा 200 मीटर तक ऊंची सुनामी तरंगें पैदा हुई थी। फजोर्ड, ग्रीनलैंड के द्वीप पर स्थित एक लंबी, संकीर्ण और गहरी समुद्री खाड़ी है। सुनामी के इसकी दीवारों से टकराने पर यह भयंकर तरंगों की आवाज पैदा हुई थी। इस शोध के परिणाम साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए है।

वैज्ञानिकों ने कैसे तरंगों का पीछा किया
शोधकर्ताओं की टीम ने इन तरंगों के संकेतों का पीछा किया, जो पूर्वी ग्रीनलैंड के एक बड़े क्षेत्र तक पहुंची। इसके बाद स्थानीय वैज्ञानिकों से संपर्क किया, तो पता चला एक निर्जन घाटी में बड़ी सुनामी दर्ज की थी। इसके बाद उपग्रह तस्वीरों और ड्रोन वीडियो की मदद से शोधकर्ताओं ने इस घटनाक्रम का सही क्रम पता किया, जिसके चलते 9 दिन तक धरती को हिला दिया था। इसमें पाया गया कि घाटी के ऊपर चट्टानों के खिसकने से एक ग्लेशियर ढह कर फजोर्ड घाटी के किनारे में समा गया था। यह ग्लेशियर गीजा के 10 पिरामिड के बराबर था। शोधकर्ताओं ने जब इस जगह का दौरा किया तो उन्हें ग्लेशियर पर काली धारियां मिलीं, जो कि ऊंची लहरों के कारण बनी थी। यह लहरें स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी दो गुना ज्यादा ऊंची थी और इनके कारण फजोर्ड के आस पास की सारी वनस्पति भी नष्ट हो गई थी।

तरंगें 9 दिनों तक क्यों महसूस हुई
आमतौर पर सुनामी की तरंगें कुछ मिनट या कुछ घंटों में गुजर जाती हैं, लेकिन इस घटना में यह तरंगें 9 दिन तक क्यों बनी रही, इसका पता लगाने के लिए शोधकर्ताओं ने उच्च गुणवत्ता के नक्शे बनाकर घाटी की सटीक आकृति और गहराई का पता लगाया। इन नक्शों का उपयोग कर कंप्यूटर पर सुनामी का सिमुलेशन किया। सिमुलेशन से शोधकर्ताओं को पता चला कि, जब सुनामी आई, तो यह एक संकरी घाटी में प्रवेश कर गई। इस घाटी में एक तरफ बड़ी चट्टान थी और दूसरी तरफ बर्फ का ढेर। ये दोनों बाधाएं सुनामी की तरंगों को वापस मोड़ देती थीं, जिससे वे एक ही जगह उछलती रहती थीं। इसी वजह से सुनामी की तरंगें करीब 9 दिन तक बनी रहीं।