पुलिस के अनुसार, अनारुल को यह पता चला था कि उनका नाम संशोधित मतदाता सूची से हटा दिया गया है। इस जानकारी के बाद वह गहरे मानसिक तनाव में आ गए थे। परिवार का दावा है कि वह लगातार परेशान थे और इस मुद्दे को लेकर चिंतित रहते थे। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, उनका नाम पहले अंडर एडजुडिकेशन की स्थिति में था, लेकिन बाद में सूची से हट गया। इससे उन्हें यह डर था कि वह मतदान के अधिकार से वंचित हो जाएंगे, जो उनके लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ।