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किसी ने कहा घोषणाओं का बोझ, तो किसी ने बताया विकास की नींव

बजट पर नेताओं की तल्ख प्रतिक्रियाएं शिक्षा, रोजगार और कर सुधारों पर गरमागरम बहस हुब्बल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 पर शहर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे घोषणाओं और दिखावे से भरा बताया, वहीं उद्योग जगत और कुछ पूर्व मंत्रियों ने […]

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Some called it a burden of announcements, while others described it as the foundation of development

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

बजट पर नेताओं की तल्ख प्रतिक्रियाएं

शिक्षा, रोजगार और कर सुधारों पर गरमागरम बहस

हुब्बल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 पर शहर में राजनीतिक और सामाजिक हलकों से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी नेताओं ने इसे घोषणाओं और दिखावे से भरा बताया, वहीं उद्योग जगत और कुछ पूर्व मंत्रियों ने इसे विकास और स्थिरता की दिशा में उठाया गया व्यावहारिक कदम माना।

"घोषणाओं का बजट, जनता का बोझ"

हुब्बल्ली-धारवाड़ पूर्व के विधायक और कर्नाटक स्लम विकास बोर्ड अध्यक्ष प्रसाद अब्बय्या ने बजट को "श्रीमंतों का बजट" करार दिया। उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, सोने की कीमत 1.50 लाख रुपए पार कर चुकी है और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। अब्बय्या ने आरोप लगाया कि काले धन की वापसी, डॉलर की कीमत नियंत्रण और किसानों को एमएसपी कानून के तहत पर्याप्त समर्थन जैसे मुद्दों पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि "भारत विश्वगुरु" का सपना दिखाने वाले अब 2047 में "विकसित भारत" की बात कर रहे हैं, लेकिन यह केवल जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास है।

"दृष्टिकोणहीन और जनता विरोधी बजट"

केपीसीसी महासचिव रजत उल्लागड्डीमठ ने बजट को "जनता विरोधी" बताते हुए कहा कि इसमें किसानों, महिलाओं और पिछड़े वर्गों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सांसद राज्य के लिए जन-हितकारी योजनाएं लाने में विफल रहे हैं। बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा "कागजों तक सीमित" रहा है।

शिक्षा का कॉर्पोरेटिकरण - एआईडीएसओ का विरोध

एआईडीएसओ ने बजट को सार्वजनिक शिक्षा को कमजोर करने वाला करार दिया। संगठन की शशिकला मेटी ने कहा कि "यूनिवर्सिटी टाउनशिप" और "इंडस्ट्रियल इंटीग्रेशन" जैसी योजनाएं छात्रों को केवल अर्ध-कुशल श्रमिक बनाने की दिशा में ले जाएंगी। शिक्षा के लिए जीडीपी का मात्र 2.7 प्रतिशत आवंटन और ऋण आधारित सहायता को बढ़ावा देना छात्रों को कर्ज के बोझ में धकेलने जैसा है। संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की घोषणा की है।

कर सुधारों पर जोर

सीए अक्षय सिंघी ने ने बजट को संतुलित और भविष्य-दृष्टि वाला बताया। उन्होंने कहा कि महंगाई नियंत्रण, बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक योजनाओं पर जोर दिया गया है। एमएसएमइ और स्टार्टअप को प्रोत्साहन से आर्थिक गति बढ़ेगी। बजट की सबसे बड़ी घोषणा नए आयकर कानून की रही, जो 1 अप्रेल 2026 से लागू होगा। इसे अधिक संक्षिप्त और स्पष्ट बताया गया है। डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और सरल टीडीएस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी।

"जनहित और स्थिरता पर केंद्रित बजट"

मुंडरगी के व्यापारी पवन चोपड़ा ने इसे जनहितैषी बताते हुए कहा कि टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव न होने के बावजूद रिटर्न भरने की समय-सीमा बढ़ाना और प्रक्रिया को सरल बनाना सराहनीय है। 12 लाख रुपए तक आय पर टैक्स न लगना मध्यम वर्ग के लिए राहत है। विदेश में शिक्षा और चिकित्सा खर्च पर करदाताओं को राहत देने का प्रावधान भी किया गया है। हालांकि मध्यम वर्ग को कर राहत की अधिक उम्मीद थी, फिर भी यह बजट विकास और स्थिरता की दिशा में व्यावहारिक कदम है।

"भारत को तीसरी आर्थिक शक्ति बनाने वाला बजट"

स्वर्णा ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक डॉ. सीएच. वीएसवी प्रसाद ने कहा कि बजट शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, एमएसएमइ, सेमीकंडक्टर और पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है। इससे दीर्घकाल में आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। कृषि क्षेत्र में नारियल, चंदन और काजू जैसी फसलों को प्रोत्साहन से कर्नाटक के किसानों को सीधा लाभ होगा।

"विकसित भारत की नींव"

पूर्व मंत्री शंकर पाटील मुनेनकोप्प ने बजट को जनस्नेही बताते हुए कहा कि आयकर सीमा में बढ़ोतरी मध्यम वर्ग के लिए बड़ा उपहार है। रेलवे और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं से कर्नाटक की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। यह बजट दक्षिण भारत के समग्र विकास को गति देगा।