
वॉशिंगटन. भारत में ज्येष्ठ पूर्णिमा जून में हर साल आती है। अमरीका समेत कई देशों में इसे ‘स्ट्रॉबेरी मून’ नाम से जाना जाता है। अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार 21 जून से ‘स्ट्रॉबेरी मून’ विशेष होगा। इस दौरान चांद आसमान में काफी नीचे नजर आएगा। ऐसा खगोलीय नजारा 19-20 साल के अंतराल में देखने को मिलता है।
लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्ट्रॉबेरी मून की शुरुआत 21 जून की सुबह करीब छह बजे होगी, लेकिन तब चांद नजर नहीं आएगा, क्योंकि गर्मियों में सूर्योदय जल्दी हो जाता है। इसे 21 जून की रात साफ देखा जा सकेगा। स्ट्रॉबेरी मून 22 जून की सुबह तक रहेगा। हालांकि अमरीका समेत कुछ दूसरे देशों में यह तीन दिन तक नजर आएगा। नासा के मुताबिक स्ट्रॉबेरी मून इस साल सबसे निचली पॉजीशन में होगा। यह क्षितिज से सिर्फ 21.9 डिग्री ऊपर रहेगा।
क्रेटर और पहाड़ों को भी देखा जा सकेगा
नासा का कहना है कि खगोल विज्ञान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह सुनहरा मौका होगा। लोग टेलीस्कोप का इस्तेमाल कर चांद की सतह पर क्रेटर और पहाड़ देख सकते हैं। इस दौरान चांद असाधारण रूप से बड़ा दिखाई देगा, लेकिन यह सुपरमून नहीं होगा। सुपरमून अगस्त में नजर आएगा।
और भी हैं नाम...
‘स्ट्रॉबेरी मून’ को हनी मून और रोज मून भी कहा जाता है। स्ट्रॉबेरी मून नाम अमरीका की जनजातियों ने दिया था। इसका आधार यह था कि इसी सीजन में स्ट्रॉबेरी पकने लगती हैं। कई देशों में इस सीजन में मधुमक्खियों के छत्ते शहद से भर जाते हैं। वहां हमारी ज्येष्ठ पूर्णिमा हनी मून हो जाती है। स्ट्रॉबेरी मून के बाद की पूर्णिमा को बक मून कहा जाता है।
Published on:
20 Jun 2024 12:55 am
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