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केलवा. क्षेत्र की पिपलांत्री पंचायत अंतर्गत उमठी तलाई की सीमा के बीच स्थित पहाड़ी पर खड़ेश्वर महादेव का 1500 साल पुराना मंदिर है, जो अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मंदिर के पुजारी नर्मदादास त्यागी ने बताया कि इस पहाड़ी पर एकदम से निर्जन वन था, यहां पर स्वयं प्रकट (स्वयंभू शिवलिंग) महादेव का शिवलिंग है, जो गेहूं के दाने के बराबर हर साल बढ़ता रहता है। कहा जाता है कि बरसों पहले यह शिवलिंग चार इंच का था, लेकिन वर्तमान में यह बढ़कर 10 इंच का हो गया है। एक सम यहां पर ग्रामीणों का आना-जाना भी मुश्किल था और आने के लिए सिर्फ एक पगडंडी मार्ग ही था। लेकिन, वर्तमान में रास्ता बन जाने से श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई परेशानी नहीं है। मंदिर से कुछ ही दूरी पर जल कुंड है, जिसमें अकाल के समय में भी पानी भरा रहता है। लेकिन, वर्तमान में मार्बल खदानों के काफी गहराई तक चले जाने से इस कुण्ड का जल भी काफी गहराई में चला गया है फिर भी सावन के महीने में यह कुंड भरा रहता हैं। ऐसे में आज भी इसी कुण्ड के जल से महादेव का जलाभिषेक किया जाता है।
मंदिर के नीचे प्राकृतिक गुफा बनी हुई है, जिसे ग्रामीण चमत्कारिक मानते हैं। लोकमान्यता है कि इस गुफा में साल में एक बार पूर्णिमा के दिन महादेव का तांडव नृत्य, ढोल-नगाड़े की आवाज सुनाई देती है।
श्रावण माह में यहां भक्तों का दर्शनों के लिए तांता लगा रहता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां पर भक्तों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती है। मनोकामना की पूर्ति पर भक्त यहां पर खीर और मालपुए का भोग भोलेनाथ का धराते हैं। विशेष रूप से मार्बल खनन क्षेत्र में होने के कारण मार्बल इकाईयों में अनहोनी से बचने के लिए खदान मालिक, कार्मिक आदि आते-जाते यहां दर्शन करने के बाद ही आगे बढ़ते हैं।
Published on:
29 Jul 2025 12:57 pm

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