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नगर निगम की आमदनी में कम हो रही दुकानों की साझेदारी

कहीं पर रह गई अधूरी दुकान, तो कहीं पर कर रहे दुकानों को सरेंडर

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AAnandam

आनंदम सिटी के सामने की दुकानें।

शहर के अधोसंरचनात्मक विकास में सडक़ों के किनारे, गली मोहल्लों, बाजारों में बनी पक्की दुकानों की काफी भूमिका होती है। इन दुकानों से निगम की आमदनी भी अच्छी खासी हो जाती है। निजी भूमि है तो संपत्तिकर के माध्यम से कमाई भी हो जाती है, परंतु कहीं न कहीं निगम की बनाई गई दुकानों में व्यापारिक कारोबार में विफल हो रहा है। इसके हर जगह अलग कारण हैं। उल्लेखनीय है कि निगम के सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं दे पाने में एक वजह इन दुकानों की विफलता भी है। निगम के आंकड़ों की मानें तो शहर में नई पुरानी निर्माणाधीन दुकानों सहित 2000 से अधिक दुकाने हैं, जिनसे सालाना करीब ढाई करोड़ रुपए से अधिक आय होती है। परंतु अब निगम नई दुकानों की बिक्री कर पाने में काफी स्थानों में असफल हो रहा है।

अतिक्रमण हटाने में विफल

निगम मुख्य बाजारों के अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई अक्सर ही करता है, लेकिन छोटा तालाब के मुख्य गेट से सटे हुए अतिक्रमण को हटा पाने में असमर्थ है। जबकि दूसरे तरफ निगम ने चौपाटी विकसित करने के लिए छोटा तालाब के बगल से 24 शेड 50-50 हजार रुपए में आवंटित कर दो से चार हजार रुपए तक किराया नियत कर रखा है। अब दुकानें सरेंडर करने निगम पहुंच रहे हैं।

आनंदम की दुकानें रह गईं अधूरी

सोनपुर रोड में स्थित आनंदम सिटी के सामने दो दर्जन से अधिक दुकानें बन रही हैं। इनमें से कुछ दुकान पूरी तरह बन गई हैं, लेकिन कई दुकानों का काम बाकी है। एक दो लोगों ने दुकान खोली और बाद में कामकाज समेटकर दुकान बेचना का है, बोर्ड लगा लिया। हालांकि निगम के अधिकारी दुकानों के पूरी नहीं बन पाने का कारण नहीं बता पा रहे हैं।

बैतूल इमलीखेड़ा रोड पर भी परेशानी

नगर निगम ने बैतूल इमलीखेड़ा रोड पर दुकानें बनाकर बेची हैं, लेकिन इनमें से कई दुकानदारों को नियमित बिजली कनेक्शन ही नहीं मिल रहा है। अस्थाई कनेक्शन से काम चला रहे हैं, लेकिन यह काफी महंगा पड़ रहा है।

खजरी में आधी दुकानें आवंटित

खजरी रोड में ओवरब्रिज के नीचे करीब ढाई दर्जन दुकानें बन रही हैं। इनमें से काफी दुकानें आवंटित हो चुकी हैं। पूर्व में मेडिकल कॉलेज के रुके काम के कारण इन दुकानों की पूछ परख नहीं हो रही है।

दुकानों में खर्च अधिक

सोनपुर किफायती आवास में भी करीब डेढ़ दर्जन दुकानें बनाकर निगम बेच चुका है, लेकिन इन दुकानों को लेने के बाद बमुश्किल 4-5 दुकानें खुली हैं। बताया जा रहा है कि सोनपुर किफायती आवासों में से आधे फ्लैट अभी भी रिक्त हैं। दुकानों के लिए पर्याप्त ग्राहकी नहीं है। इसके कारण कुछ लोग दुकानें बेचने का मन बना चुके हैं।

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