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जिला अस्पताल में शुद्ध पानी की गारंटी नहीं

-स्टाफ खुद कैंपर खरीदकर बुझा अपनी प्यास, अटैंडर भी खरीद रहे पानी -पांच साल पहले लगभग दस लाख रुपए खर्च कर १६ वार्डों में सेंट्रल शीतल आरओ पानी की कराई गई थी सुविधा, पर सिस्टम हो चुका गायब

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दमोह

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Aakash Tiwari

May 18, 2025

आकाश तिवारी
दमोह. जिला अस्पताल में शुद्ध पानी की कोई गारंटी नहीं है। यहां पर प्यास बुझाने के लिए छह वाटर बूथ अलग-अलग जगहों पर लगाए गए हैं, लेकिन पानी की शुद्धता पर न तो मरीज व अटैंडरों को यकीन है और न ही स्टाफ को। खासबात यह है कि अस्पताल का स्टाफ अस्पताल के पानी को हाथ तक नहीं लगता है।
दूषित पानी की आशंका के चलते स्टाफ कैंपर खरीदकर पानी पी रहा है। मजेदार बात यह है कि पड़ताल में पता चला है कि सिविल सर्जन कार्यालय में तीन-तीन कैंपर प्रतिदिन आते हैं। सिविल सर्जन सहित यहां का तमाम स्टाफ बाहर का पानी ही पीता है। इधर, मरीज और उनके अटैंडर भी पानी खरीदकर पी रहे हैं। हालांकि कई गरीब मरीज इसी पानी को पीने मजबूर हैं।
-१० लाख रुपए खर्च किए, पर कहां गया प्लांट
मरीजों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पांच साल पूर्व १६ लाख रुपए खर्च कर एक सेंट्रलाइज्ड आरओ सिस्टम अस्पताल में लगवाया गया था। यह काम तत्कालीन सिविल सर्जन और वर्तमान सागर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी के कार्यकाल में हुआ था। इस आरओ सिस्टम में चिलर भी था। साथ ही यह १६ वार्डों से कनेक्ट किया गया था। स्टाफ की शुरुआत में यह व्यवस्था कुछ दिन चली, फिर क्या हुआ कोई जानकारी नहीं है।
-छह जगहों पर बनाए वाटर बूथ
प्रबंधन ने पानी की व्यवस्था के लिए छह जगहों पर वाटर बूथ लगवाए हैं। इन्हें अलग-अलग वाटर कूलर से जोड़ा गया है। पत्रिका ने ग्राउंड फ्लोर पर बने दो वाटर कूलर की पड़ताल की तो उसमें से किसी से भी ठंडा पानी नहीं आ रहा था। मालूम किया तो बताया गया कि इसका सुधार कार्य सात महीने पहले हुआ था। इस दौरान कार्बन और फिल्टर बदले गए थे। वहीं, जब इसके उपयोग के बारे में बात की तो लोगों का कहना था कि पानी खरीदकर न पीने वाले ही इस पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं।
मजबूरी है पानी खरीदना…
मेडिकल वार्ड में भर्ती आशा रानी के रिश्तेदार साहब सिंह ने बताया कि अस्पताल में ठंडा पानी नहीं है। पानी वाली जगह भी गंदी है। मजबूरी में बाहर से पानी ला रहे हैं। इसी तरह प्रेमबाई ने बताया कि उसकी बहु एमसीएच में भर्ती है। पानी गंदा होने के डर से बाहर से ही पानी खरीदकर ला रहे हैं।

गोलमोल जवाब दे रहे जिम्मेदार
मामले में जब अस्पताल प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह से बात की तो पहले उनका कहना था कि डेढ़ साल पहले सेंट्रलाइज्ड आरओ सिस्टम चालू करा दिया है। पर जब उनसे पूछा कि फिर क्यों वॉटर कूलर लगे हुए हैं, तब वे इसका जवाब नहीं दे पाए। हालांकि बाद में उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही है।

फैक्ट फाइल
-२ लाख लीटर पानी प्रतिदिन जरूरी।
-१५ हजार लीटर पानी पीने के लिए प्रतिदिन चाहिए।
-मरीज व अटैंडर मिलाकर प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा को होती है पीने के पानी की आवश्यकता।
-हर वार्ड में अटैंडर पानी की बॉटले रखते हैँ साथ में।

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