
The state's first government drug de-addiction center has not yet been operationalized despite approval in the budget
हनुमानगढ़. नशा मुक्ति के महंगे इलाज के चलते नशे के बढ़ते रोग से हालात बदतर होते जा रहे हैं। कमाऊ पूतों के नशेड़ी हो जाने से आर्थिक रूप से कमजोर परिजन चाहकर भी उनका इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। क्योंकि निजी नशा मुक्ति केन्द्रों की महंगी फीस चुकाना उनके बूते से बाहर है। वहीं सरकारी नशा मुक्ति केन्द्र राज्य बजट में मंजूर होने के बावजूद अब तक संचालित नहीं हो सका है। एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक राजकीय नशा मुक्ति केन्द्र महज कागजी घोषणा ही बना हुआ है। राज्य व लोकसभा चुनाव आचार संहिता के चलते भी विलम्ब हुआ है।
हालांकि जिला कलक्टर कानाराम के आने बाद उन्होंने इस दिशा में प्रयास किए। उसका परिणाम यह रहा कि जिला स्तर पर नशा मुक्ति केन्द्र संचालन के लिए अस्थाई तौर पर भवन चिह्नित किया जा चुका है। किन्तु भवन संबंधी प्रस्ताव भी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता निदेशालय को भिजवाए हुए महीनों बीत चुके हैं। ना तो वहां से प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकी है और ना ही खारिज किया गया है।
जानकारों की माने तो नशा मुक्ति केन्द्र स्वीकृति के बाद सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के जरिए चिकित्सा विभाग के सहयोग से इसका संचालन तय हुआ। इस बीच जिला कलक्टर कानाराम ने लोकसभा चुनाव आचार संहिता से पहले इस दिशा में स्थानीय स्तर पर प्रयास किए। चिकित्सा विभाग को जगह का चयन करने का निर्देश दिया। चिकित्सा विभाग ने राजकीय कैनाल कॉलोनी अस्पताल का इसके लिए चयन किया। मगर यह भवन तभी मिल सकेगा जब कैनाल कॉलोनी अस्पताल को रिले केन्द्र के पास बन रहे नए भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा। हालांकि चिकित्सा विभाग से भवन संबंधी रिपोर्ट मिलने के बाद यह प्रस्ताव सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता निदेशालय को भिजवाया जा चुका है।
निजी नशा मुक्ति केन्द्रों की बढ़ती शिकायतों और उनके महंगे इलाज से तंग रोगियों व उनके परिजनों को राहत देने के लिए राज्य का पहला राजकीय नशा मुक्ति केन्द्र हनुमानगढ़ में पिछले साल राज्य बजट में मंजूर किया गया था। निजी नशा मुक्ति केन्द्रों में बिना चिकित्सकों तथा प्रशिक्षित स्टाफ के इलाज करने, रोगियों को प्रताडि़त करने, प्रताडऩा से रोगियों की मौत होने, रंजिश के आधार पर बंधक बनाने, इलाज के नाम पर महंगी फीस वसूलने आदि से संबंधित कई प्रकरण पिछले कुछ बरसों में सामने आ चुके हैं। नशे से पीडि़त अधिकांश रोगी जरूरतमंद परिवार के होते हैं या फिर नशे में सब कुछ खोकर गरीब हो जाते हैं, ऐसे में निजी नशा मुक्ति केन्द्रों की महंगी फीस देकर वहां इलाज कराना उनके बूते से बाहर की बात हो जाती है। इसलिए राजकीय नशा मुक्ति केन्द्र संचालन की जरूरत है।
जिले में मेडिकेटेड, चिट्टे आदि का नशा निरंतर बढ़ रहा है। दवा का नशे में इस्तेमाल बड़ी बीमारी बन चुका है। पिछले चार बरस में जिला पुलिस 15 लाख से ज्यादा नशीली दवा व कैप्सूल जब्त कर चुकी है। जबकि बीते दो बरस में पुलिस साढ़े नौ किलोग्राम से ज्यादा चिट्टा जब्त कर चुकी है। यही चिंतनीय स्थिति अफीम, पोस्त, शराब आदि की है। शराब की प्रति व्यक्ति खपत में हनुमानगढ़ जिला प्रदेश के सबसे अग्रणी जिलों में शुमार है।
नशा मुक्ति केन्द्र के लिए भवन चिह्नित कर निदेशालय को प्रस्ताव भिजवाया जा चुका है। अब तक वहां से कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। निदेशालय से निर्देश के आधार पर आगामी कार्यवाही होगी। - सुरेन्द्र कुमार, उप निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग।
जिला कलक्टर के निर्देश पर भवन चिह्नित कर रिपोर्ट दे चुके हैं। कैनाल कॉलोनी अस्पताल का भवन खाली होने पर वहां एक बार नशा मुक्ति केन्द्र संचालित करना प्रस्तावित है। - डॉ. नवनीत शर्मा, सीएमएचओ।
Published on:
30 May 2024 12:14 pm
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