
तुर्रा दल व कलंगी दल के बीच हुआ रोमांचकारी हिंगोट युद्ध
गौतमपुरा. बुधवार को गौतम ऋषि की पावन नगरी गौतमपुरा में सदियों से चला आ रहा भाईचारे से खेले जाने वाला रोमांचकारी हिंगोट युद्ध का आयोजन हुआ। एक बार फिर बिना प्रचार-प्रसार के बावजूद प्रदेश के कई शहरों से हजारों की संख्या में दर्शक हिंगोट युद्ध देखने पहुंचे।
देवनारायणजी दर्शन के बाद हिंगोट युद्ध हुआ प्रारंभ
दोपहर के 2 बजे से अन्य शहरों से दर्शकों का आवागमन शुरू हो गया। युद्ध देखने का उत्साह इतना था कि 4 बजे ही पूरा हिंगोट मैदान दर्शकों से भर गया। हिंगोट युद्ध लडऩे वाले दोनों दल के योद्धा ढोल-धमाकों के साथ जुलूस के रूप में अलग-अलग बडऩगर रोड स्थित देवनारायण भगवान के मंदिर पहुंचे । दर्शन के बाद योद्धाओं ने मैदान के लिए कूच किया। स्थानीय व बाहर से आए हजारों दर्शकों की उपस्थिति में सिर पर साफा, एक हाथ में ढाल, अग्निबाण से भरा हुआ झोला कंधे पर लटकाए योद्धा मैदान पर उतरे तो दर्शक रोमांचित हो गए। पूरा मैदान ताली की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। शुरुआत में 50 से 60 योद्धा आमने-सामने थे। योद्धा में उत्साह इतना था कि बिना संकेत मिल 4.30 बजे हिंगोट युद्ध प्रारंभ कर लिया। 4.45 बजे युद्ध को रोक दिया क्योंकि बहुत से योद्धा मैदान पर नहीं पहुंचे थे। 5 बजे फिर दोबारा संकेत मिलते ही हिंगोट युद्ध प्रारंभ हुआ।
देखते ही देखते दोनों ओर से रॉकेट की तरह चलने वाले हिंगोट की बरसात हो गई । जलते हिंगोट से एक-दूसरे पर वार होने लगे। लगभग 1 घंटे 20 मिनट चले इस युद्ध में दोनों ओर से आग बरसाती रही। गोलियों की तरह चले हिंगोट कभी ढाल से टकराकर कभी जमीन से टकराकर दर्शकों की ओर भी रुख कर लिया । दिशा भटक कर जो हिंगोट दर्शकों के बीच गिरता सनसनी फैल गई।पूरा मैदान लोगों की आवाज से गूंज उठता। जैसे-जैसे अंधेरा होता गया वैसे रोमांच बढ़ता गया। सनसनाते हिंगोट की चपेट में योद्धाओ के हिंगोट के भरे झोले भी चपेट में आ गए। इस कारण 4 से अधिक झोले जलकर खाक हो गए। हिंगोट की चपेट में आने से जब-जब झोले जले मैदान पर बैठे दर्शक रोमांचित हो गए।
उत्साह के साथ खेला गया युद्ध
हिंगोट युद्ध भाई चारे के साथ खेला गया । युद्ध के दौरान मैदान के अंदर व बाहर कई घटनाएं हुई। जिसका आनंद दर्शकों ने भरपूर उठाया। हमेशा की तरह योद्धा के साथ दर्शक भी घायल हुए। इस वर्ष 46 लोग मामूली घायल हुए । जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे गई । अंत में 20 हजार से अधिक दर्शकों की मौजूदगी में दोनों दल के योद्धाओं ने ना हम जीते ना तुम हारे के साथ युद्ध की समाप्ति हुई।
Published on:
26 Oct 2022 11:34 pm
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