
चेन्नई. केंद्रीय विद्युत रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में शाम के पीक आवर्स के दौरान राज्य की बिजली की मांग 18,600 मेगावाट है, जबकि उपलब्ध आपूर्ति केवल 15,646 मेगावाट है, जो 2,954 मेगावाट की कमी है। मार्च में कमी 3,812 मेगावाट और अप्रेल में 4,697 मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है और यह कमी दिसंबर तक जारी रहेगी। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि जून तक सौर ऊर्जा घंटों के दौरान राज्य में अधिशेष बिजली होगी।
तमिलनाडु बिजली बोर्ड (टीएनईबी) के अधिकारियों ने घाटे का मुख्य कारण खुद बिजली उत्पादन की कमी बताया। जबकि औसत बिजली की मांग प्रतिदिन 15,000 मेगावाट है, टीएनईबी केवल 4,000 मेगावाट बिजली पैदा करता है, शेष आपूर्ति के लिए निजी क्षेत्र पर निर्भर रहता है। दक्षिणी क्षेत्र विद्युत समिति ने अनुमान लगाया है कि इस वर्ष राज्य की अधिकतम विद्युत मांग 22,150 मेगावाट रहेगी जबकि पिछले वर्ष मई में विद्युत मांग 20,830 मेगावाट थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जनसंख्या वृद्धि और उद्योगों के विस्तार के कारण तमिलनाडु की बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है।
राज्य विद्युत उपयोगिता लगभग 3.5 करोड़ उपभोक्ताओं को सेवा प्रदान करती है जिनमें 2.5 करोड़ घरेलू उपयोगकर्ता, 40 लाख वाणिज्यिक उपभोक्ता और 25 लाख कृषि कनेक्शन शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा राज्य की बिजली की जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है, लेकिन ताप विद्युत उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम इस कमी को पूरा करने के लिए अप्रैल से पहले उत्तरी चेन्नई स्टेज-III 800 मेगावाट ताप विद्युत स्टेशन का वाणिज्यिक संचालन शुरू करने की योजना बना रहे हैं। गर्मियों में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए एक अन्य अधिकारी ने निजी बिजली खरीद और अदला-बदली व्यवस्था पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि टीएनईबी अल्पकालिक व्यवस्था कर रहा है, मार्च और मई के बीच करीब 4,000 मेगावाट बिजली खरीदने की योजना बना रहा है ताकि अपेक्षित बिजली की कमी को पूरा किया जा सके। उन्होंने स्वैप पावर व्यवस्था के बारे में विस्तार से बताया जिसके तहत तमिलनाडु मध्य प्रदेश और राजस्थान के साथ पीक आवर्स के दौरान बिना किसी मौद्रिक लेनदेन के बिजली का आदान-प्रदान करता है।
अधिकारी ने आश्वासन दिया
अधिकारी ने आश्वासन दिया कि इन उपायों के साथ तमिलनाडु 2025 में गर्मियों की मांग को बिना किसी परेशानी के प्रबंधित कर लेगा। अधिकारी ने बिजली की बढ़ती लागत पर भी चिंता जताई। कई बार बिजली कंपनी को 20 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ती है जबकि खुद बिजली उत्पादन की लागत 6 रुपए प्रति यूनिट से कम है। उम्मीद है कि गर्मियों में बिजली की कीमत बढ़ जाएगी।
Updated on:
12 Feb 2025 04:55 pm
Published on:
12 Feb 2025 04:55 pm
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