
करौली. यहां मंडरायल मार्ग पर जिला अस्पताल के मातृ-शिशु चिकित्सालय (एमसीएच) परिसर स्थित पास कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) का शुक्रवार से फिर से संचालन शुरू हो गया। गत करीब 7 माह से इस उपचार केन्द्र पर कुपोषित बच्चों को उपचार नहीं मिल पा रहा था। गत दिनों राजस्थान पत्रिका में प्रमुखता से इस संबंध में खबर प्रकाशित होने के बाद चिकित्सालय प्रशासन हरकत में आया और शुक्रवार से कुपोषण वार्ड के लिए स्टाफ लगाते हुए इसे शुरू करने की कार्रवाई की। इससे अब कुपोषित बच्चों की देखभाल होने के साथ उन्हें वजन के अनुसार डाइट मिल सकेगी। चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. रामकेश मीना ने बताया कि कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) को शुरू कर दिया गया है। 3 चिकित्सक, नर्सिंगकर्मी और दो अन्य स्टाफ इस केन्द्र में लगाए गए हैं।
इससे अब वार्ड में कुपोषित बच्चों को भर्ती करने के साथ उन्हें निर्धारित डाइट मिल सकेगी। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में जिला चिकित्सालयों में कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) स्थापित किए थे। इन केंद्रों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा निर्धारित निर्देशों के अनुसार उपचार किया जाता है। जिसमें बच्चे की ऊंचाई, वजन और भूख पर विशेष ध्यान के अलावा आहार, दवा और निगरानी व्यवस्था लागू है, लेकिन करौली जिला मुख्यालय पर एमटीसी केन्द्र का संचालन बंद था। इसे लेकर 30 अप्रेल के अंक में राजस्थान पत्रिका में Óएमटीसी में सात माह से कुपोषित बच्चों को नहीं मिल रहा उपचारÓ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी, जिसमें बताया था कि सितंबर माह में एमटीसी में एक मरीज के भर्ती होने के बाद अब तक एमटीसी में कोई मरीज भर्ती नहीं हुआ है। इसके बाद वार्ड को शुरू किया है।
उल्लेखनीय है कि कुपोषण उपचार केन्द्र में 6 माह से 5 वर्ष तक के कुपोषित बच्चों का उपचार किया जाता है। इसके लिए सरकार ने चिकित्सालय में ही कुपोषित बच्चों को गाइड लाइन के अनुसार नि:शुल्क भोजन (डाइट) तथा मरीज के साथ आए परिजनों को भी 225 रुपए आर्थिक राशि दिए जाने का प्रावधान कर रखा है।
तीन चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ नियुक्त
वार्ड के प्रभारी पीएमओ डॉ. रामकेश मीना होंगे, जबकि दो अन्य चिकित्सक भी वार्ड में लगाए हैं। इनके अलावा नर्सिंग प्रभारी लगाने के साथ दो अन्य स्टाफ भी वार्ड में लगाया है। वार्ड के शुरू होने के बाद उसमें भर्ती होने वाले बच्चों को वजन के अनुसार अब डाइट भी मिल सकेगी। कुपोषित बच्चों को दूध, दलिया, खिचड़ी, हलवा, मुरमुरे आदि गुणवत्तापूर्ण डाइट प्रत्येक दो घंटे के हिसाब से तय है। इसमें भी वजन के अनुसार बच्चे को डाइट दी जाती है जिसका माप पहले से निर्धारित है।
Published on:
03 May 2024 09:42 pm

बड़ी खबरें
View Allसमाचार
ट्रेंडिंग
