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‘मेहनत व संघर्ष के लिए जाना जाता है आदिवासी’

विश्व आदिवासी दिवस: पारंपरिक वेशभूषा के साथ १० हजार से अधिक आदिवासी समाजजन हुए शामिल

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World aadiwasi day Alirajpur

मेहनत व संघर्ष के लिए जाना जाता है आदिवासी

आलीराजपुर. पिछले 150 सालों से हमारे देश में षडय़ंत्र पूर्वक टंट्या मामा का इतिहास छुपाया गया। इसमें विभिन्न पार्टियां शामिल हैं। इतने सालों बाद हमने टंट्या मामा का गौरव स्थापित किया। हमारा तो टंट्या ही मामा है, कोई दूसरा मामा अब प्रदेश में नहीं चलेगा। टंट्या मामा ने आदिवासियों के लिए जमीनें बचाई। यह बात विश्व आदिवासी दिवस पर स्थानीय कॉलेज मैदान पर आदिवासी समाज व जयस की ओर से आयोजित समारोह में आदिवासी समाज के विद्वान, बिरसा ब्रिगेड के संस्थापक सतीश पैदाम ने कही।
विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन में जिले से करीब १० हजार आदिवासीजन शामिल हुए। इस दिन पूरे प्रदेश में पहली बार किसी जिला मुख्यालय पर आदिवासी समाज के प्रणेता व अंग्रेजों से लड़ाई लडऩे वाले सबसे पहले आदिवासी क्रांतिकारी टंट्या मामा की आदमकद मूर्ति नगर के दाहोद नाका पेट्रोल पंप के सामने स्थापित की गई। टंट्या मामा की मूर्ति स्थापना समारोह के पूर्व कालेज मैदान से विशाल रैली निकाली गई। रैली का विभिन्न समाज सहित राजनीतिक दलों ने स्वागत किया। रैली का समापन वापस दाहोद नाके पर हुआ। जहां विधि विधान से टंटया मामा की आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई।
हर गांव में लगेगी टंटया मामा की मूर्ति
मुख्य वक्ता सतीश पैदाम ने कहा कि आज तो सिर्फ आलीराजपुर में ही टंट्या मामा की मूर्ति लगी है, किंतु आने वाले दिनों में हर गांव में टंट्या मामा की मूर्ति लगेगी। मंच पर सभी आदिवासी जन प्रतिनिधियों और टंटया मामा के रथ को जिले में लाकर भ्रमण कराने वाले आदिवासी युवाओं के दल का मंच पर बुलाकर सम्मान किया। समाज के पुजारा ने विधि विधान से टंटया मामा के चित्र की पूजा अर्चना की। इसमें आदिवासी महिला मंडल की महिलाओं ने सहयोग किया। आयोजन को सफल बनाने में जय आदिवासी युवा संगठन, अजाक्स, आकाश, आदिवासी महिला मंडल, जयस के अरविंद भाई भूरु, नितेश अलावा, विक्रम चौहान का योगदान रहा। महिला मंडल की अध्यक्ष प्रीती डावर ने स्वागत भाषण दिया।