कुम्हार समाज की मुख्य आजीविका का आधार आज भी मिट्टी ही है। मिट्टी के दीये से लेकर बड़ी-बड़ी मूर्ति तैयार करने वाले ये कारीगर सिर्फ अपने परिवार का भरण पोषण ही कर पा रहे हैं। न तो इन्हें सरकारी सहायता मिलती है और न ही इन्हें कोई विशेष छूट। वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए इस समाज की कई पीढिय़ां खप गईं।