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Water : जल संरक्षण और सामुदायिक कल्याण : उन्नत जल उपचार संयंत्र का किया उद्घाटन

जल संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, डियाजियो इंडिया ने द एनर्जी एंड रिसोर्सेज़ इंस्टिट्यूट (टेरी) के साथ साझेदारी में अलवर के गूंदपुर गांव में टेरी एडवांस्ड ऑक्सीडेशन टेक्नोलॉजी आधारित एक उन्नत जल उपचार संयंत्र का उद्घाटन किया।

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जयपुर

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Murari

Feb 18, 2026

Water conservation

Water conservation

— अलवर जिले के गूंदपुर गांव में लगा है यह संयंत्र

अलवर। जल संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए, डियाजियो इंडिया ने द एनर्जी एंड रिसोर्सेज़ इंस्टिट्यूट (टेरी) के साथ साझेदारी में अलवर के गूंदपुर गांव में टेरी एडवांस्ड ऑक्सीडेशन टेक्नोलॉजी आधारित एक उन्नत जल उपचार संयंत्र का उद्घाटन किया। यह संयंत्र क्षेत्र में डियाजियो इंडिया की विनिर्माण इकाई के समीप स्थित है। इस पहल को ग्रामोदय सामाजिक संस्थान का भी सहयोग प्राप्त है।

यह संयंत्र गांव में उत्पन्न ग्रे वॉटर के उपचार के लिए स्थापित किया गया है, ताकि इसे गैर-पेय पुनः उपयोग के कार्यों में इस्तेमाल किया जा सके। इससे स्थानीय समुदाय के लिए जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और सतत जल प्रबंधन को समर्थन मिलेगा। यह पहल उपचारित ग्रे वॉटर के पुनः उपयोग को सक्षम बनाकर तथा विशेष रूप से जल-अभावग्रस्त क्षेत्रों में ताजे पानी पर निर्भरता कम करके, जल प्रबंधन के परिपत्र (सर्कुलर) दृष्टिकोण को मजबूत करती है। संयंत्र की कुल उपचार क्षमता प्रतिदिन 10 घन मीटर है, जो वार्षिक रूप से लगभग 3.65 मिलियन लीटर पानी के उपचार के बराबर है। अनुमानित 30 वर्षों के जीवनचक्र में, यह सुविधा लगभग 110 मिलियन लीटर अपशिष्ट जल के उपचार और पुनः उपयोग को संभव बनाएगी, जिससे समान मात्रा में भूजल संरक्षण होगा।

टेरी की पेटेंटेड एडवांस्ड ऑक्सीडेशन टेक्नोलॉजी एक अभिनव और विज्ञान-आधारित समाधान है, जो यूवी -आधारित फोटोकैटलिटिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अपशिष्ट जल में मौजूद प्रदूषकों को तोड़ती है। यह तकनीक नगरपालिका सीवेज, ग्रे वॉटर और औद्योगिक अपशिष्ट जल के कुशल उपचार के लिए डिज़ाइन की गई है, जिसमें पारंपरिक प्रणालियों की तुलना में रसायनों का उपयोग और कीचड़ (स्लज) का उत्पादन काफी कम होता है। यह गैर-पेय पुनः उपयोग के लिए उपयुक्त उच्च-गुणवत्ता वाला उपचारित पानी उपलब्ध कराती है, साथ ही यह ऊर्जा-कुशल, मॉड्यूलर और मौजूदा अवसंरचना के अनुकूल है।

प्रति वर्ष 3.65 मिलियन लीटर पानी की बचत होगी

समुदाय के लिए जल उपलब्धता के अलावा, इस पहल से प्रति वर्ष अनुमानित 3.65 मिलियन लीटर ताजे पानी की बचत होने की उम्मीद है, जिससे भूजल संरक्षण में योगदान मिलेगा। इस परियोजना में प्रति वर्ष लगभग 25 टन कार्बन डाईऑक्साइड समतुल्य कार्बन शमन क्षमता का भी अनुमान है, जो ताजे पानी की पंपिंग में कमी, मीथेन उत्सर्जन से बचाव और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के एकीकरण के माध्यम से संभव होगा।

डियाजियो इंडिया के निदेशक – कॉरपोरेट अफेयर्स, देवाशीष दासगुप्ता ने कहा: “डियाजियो इंडिया के लिए जल संरक्षण एक महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र बना हुआ है। टेरी के साथ इस साझेदारी के माध्यम से, हम स्थानीय जल चुनौतियों का समाधान सतत और समुदाय-केंद्रित तरीके से करने के लिए नवोन्मेषी तकनीक का उपयोग कर रहे हैं। यह पहल उन समुदायों के लिए साझा मूल्य सृजित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिनके साथ हम काम करते हैं और जिन्हें हम सेवा प्रदान करते हैं।”

पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए, सालुंखे गौरव रवींद्र (आईएएस), मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ज़िला परिषद, अलवर ने कहा: “सुरक्षित और स्वच्छ जल तक पहुंच सुनिश्चित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य और समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की परियोजनाएं यह दर्शाती हैं कि उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और स्थानीय प्रशासन के बीच सहयोग किस तरह समुदायों के लिए टिकाऊ समाधान प्रदान कर सकता है।”

द एनर्जी एंड रिसोर्सेज़ इंस्टिट्यूट (टेरी) के एरिया कन्वीनर एवं एसोसिएट फेलो, डॉ. प्रगड़ा सरथ चंद्र ने कहा: “टेरी की एडवांस्ड ऑक्सीडेशन टेक्नोलॉजी एक विज्ञान-आधारित समाधान है, जिसे ग्रे वॉटर को कम लागत, उच्च ऊर्जा-दक्षता, मजबूत और विश्वसनीय तरीके से गैर-पेय पुनः उपयोग मानकों तक उपचारित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। गूंदपुर में यह स्थापना समुदाय स्तर पर वास्तविक चुनौतियों से निपटने में नवोन्मेषी जल तकनीकों की क्षमता को दर्शाती है।”