
जिस समाज के युवा भटक जाते हैं, उसका भविष्य अंधकार में चला जाता है।
रेगिस्तान की रेतीली खामोशी के पीछे एक डरावनी गूंज सुनाई देने लगी है। यह गूंज ऊंटों के काफिले की नहीं, बल्कि उन अवैध फैक्ट्रियों की है जो हमारे युवाओं की रगों में सफेद मौत घोल रही हैं। थार के सीमावर्ती जिले बाड़मेर और जैसलमेर, जो पर्यटन, संस्कृति, ऊर्जा और रणभूमि में अपनी शूरवीरता के लिए जाने जाते हैं, आज ड्रग मैन्युफैक्चङ्क्षरग हब बनने की दहलीज पर खड़े हैं। पिछले कुछ महीनों के आंकड़े ही रोंगटे खड़े करने वाले हैं। छह अवैध फैक्ट्रियां पकड़ी गईं। सैकड़ों लीटर केमिकल बरामद हुआ। भारी मात्रा में एमडी मिली। यह महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। तस्करों ने बाड़मेर की भौगोलिक परिस्थितियों का फायदा उठाया है।
दूर-दराज की ढाणियां और सुनसान धोरे अब उनके लिए सुरक्षित ठिकाने बन गए हैं। जहां पुलिस की पहुंच सीमित है, वहां कच्चे मकानों और टिनशेड के नीचे मौत का सामान तैयार हो रहा है। हमारी सबसे बड़ी ताकत युवा शक्ति है, लेकिन आज वही शक्ति निशाने पर है। रातों-रात अमीर बनने का सपना और गांव-गांव तक फैली सप्लाई चेन के कारण युवा आसानी से इस दलदल में फंस रहे हैं। तस्कर स्थानीय लडक़ों को मोटी कमाई का लालच देकर अपने जाल में खींच रहे हैं। यह केवल अपराध नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक संरचना पर सीधा हमला है। इसका परिणाम भी सामने है। मानसिक संतुलन खोते युवा, अपराध की राह पर बढ़ते कदम और उजड़ते परिवार बर्बादी की कहानी कह रहे हैं। बाड़मेर अब केवल तेल और कोयले की आग से नहीं तप रहा, बल्कि नशे की भट्टी में भी झुलस रहा है। यदि आज नहीं जागे, तो कल बहुत देर हो जाएगी। केवल पुलिसिया कार्रवाई इस समस्या का समाधान नहीं है।
इसके लिए बहुआयामी प्रहार करना होगा। सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन और सेंसर आधारित हाईटेक निगरानी जरूरी है। केमिकल्स की सप्लाई पर सख्त निगरानी हो। नशा बेचने वालों को मिलने वाला राजनीतिक और सामाजिक संरक्षण तुरंत समाप्त होना चाहिए। युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि कौशल, रोजगार और खेल के मैदान चाहिए। खाली दिमाग ही तस्करों की सबसे आसान प्रयोगशाला बनता है। पंजाब की स्थिति हमारे सामने है। बाड़मेर भी उसी रास्ते पर बढ़ता दिखाई दे रहा है। तेल और गैस ने इस मिट्टी को समृद्धि दी है, लेकिन नशे का यह काला कारोबार सब कुछ राख कर सकता है। अब परिवारों को भी जागना होगा। हर मां-बाप को अपने बच्चों की बदलती आदतों, संगत और व्यवहार पर नजर रखनी होगी। यह लड़ाई केवल पुलिस और तस्करों के बीच नहीं है।
यह लड़ाई बाड़मेर के भविष्य और सफेद जहर के बीच है। प्रशासन को सख्ती दिखानी होगी, समाज को साथ आना होगा। थार को बचाना ही होगा। नसीब को जगाने के लिए अब जागना होगा, ये थार की मिट्टी है, इसे जहर से बचाना होगा। बर्बाद न हो जाए जवानी इस सफेद धुएं में, कल की खातिर, आज ही हमें लडऩा होगा।
Published on:
31 Mar 2026 05:52 pm
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