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कहीं न्याय की उम्मीद नहीं जगी तो पप्पू ने जनमंच को सुनाई पीड़ा

राजस्थान पत्रिका के जनमंच कार्यक्रम को लेकर बुधवार को लोगों में उत्साह देखने को मिलना। बड़ी संख्या में लोग यहां अपनी समसस्या के समाधान के लिए पहुंचे। शहर के साथ ही निकटवर्ती गांवों से भी लोग अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे। अधिकांश की पीडा़ थी कि जिला प्रशासन से लेकर निकायों व विभागों के दरवाजे खटखटाने व जनसुनवाई में समस्या रखने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

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भीलवाड़ा। राजस्थान पत्रिका के जनमंच कार्यक्रम को लेकर बुधवार को लोगों में उत्साह देखने को मिलना। बड़ी संख्या में लोग यहां अपनी समसस्या के समाधान के लिए पहुंचे। शहर के साथ ही निकटवर्ती गांवों से भी लोग अपनी पीड़ा लेकर पहुंचे। अधिकांश की पीडा़ थी कि जिला प्रशासन से लेकर निकायों व विभागों के दरवाजे खटखटाने व जनसुनवाई में समस्या रखने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं की अनदेखी हो रही है। पेंशन, मुआवजे के प्रकरण अटके हुए हैं। पुलिस थानों में भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। कई पीडा सुनाते हुए रो पड़े।

वह बोले की राजस्थान पत्रिका जनता की ताकत व विश्वास की लाठी है, जनमंच उनकी समस्या उठाएगा तो निश्चित रूप से प्रशासन भी गंभीरता दिखाएगा और उनके समाधान की राह भी खुलेगी। कार्यक्रम के दौरान पत्रिका ने कई समस्याओं का मौके पर ही समाधान कर दिया, इससे लोग खुश हो कर लौटे। जनमंच करेड़ा के कुम्हारिया खेड़ा का पप्पूनाथ कालेबलिया पत्नी व दो बच्चों के साथ गले में तख्ती लटका कर पहुंचा। तख्तियों के माध्यम से कालेबलिया परिवार ने इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई। परिवार ने गांव के ही कुछेक लोगों के खिलाफ उनके मकान पर कब्जा करने की नीयत से अत्याचार की दास्तां बयां की और इच्छा मुत्यु की मंशा जताई।