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नई तकनीक, स्मार्ट एक्वाकल्चर और सतत विकास की रणनीतियों को अपनाएं युवा

पं. शंभूनाथ शुक्ला विवि में एक्वा एक्सपो एवं अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ

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शहडोल. पं. शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस एवं एक्वा एक्सपो का मंगलवार को भव्य शुभारंभ हुआ। सम्मेलन में भारत और विदेशों से आए वैज्ञानिक, शोधकर्ता, उद्योग विशेषज्ञ एवं विद्यार्थी शामिल हुए। आयोजन का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन और एक्वा कल्चर में नई तकनीकों, अनुसंधान और अवसरों पर चर्चा करना है। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ दिलीप कुमार पूर्व निदेशक एवं कुलपति आईसीएआर केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान मुंबई ने किया। कार्यक्रम में मुख्य संरक्षक प्रो. राम शंकर कुलगुरु, डॉ आशीष तिवारी कुलसचिव, प्रो. अमित निगम अध्यक्ष मत्स्य विभाग, डॉ वंदना राम कॉन्फ्रेंस सचिव एवं डॉ. पियूष मिश्रा संयुक्त कॉन्फ्रेंस सचिव उपस्थित रहे। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अमित निगम ने आयोजन की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए मत्स्य विभाग के आगामी योजनाओ की चर्चा की। डॉ वंदना राम ने आयोजन की विविधताओं, विशेषताओं पर व्याखान दिया। आयोजन समिति में डॉ.उमा सिंह, डॉ. ममता प्रजापति, डॉ. योगिता बसने, डॉ. मौशमी कर, डॉ शिवानी शर्मा, डॉ पूजा गौर आदि ने विशेष सहयोग दिया।

एक्वा कल्चर व मत्स्य पालन में अपार संभावनाएं

डॉ. दिलीप कुमार ने कहा कि भारत में एक्वा कल्चर और मत्स्य पालन क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से मत्स्य पालन को और अधिक व्यवसायिक एवं सतत विकास उन्मुख बनाया जा सकता है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से मत्स्य पालन पर पडऩे वाले प्रभाव और इसे कम करने के उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्मार्ट एक्वा कल्चर, जल संसाधनों का कुशल उपयोग और टिकाऊ मत्स्य पालन की दिशा में काम करने की जरूरत है। इस क्षेत्र में नवाचार एवं उद्यमशीलता को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होने जलीय कृषि की नई तकनीकों, मत्स्य प्रजनन, मत्स्य विपणन एवं निर्यात के विषय में विस्तार से बताया।

मत्स्य पालन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा

कुलगुरु प्रो. रामशंकर ने कहा कि मत्स्य पालन भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। एक्वाकल्चर न केवल खाद्य सुरक्षा प्रदान करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न करता है। भारत को एक्वाकल्चर के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करने के लिए नवाचार और अनुसंधान पर अधिक ध्यान देना होगा। मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यह क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत अभियान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि वह नई तकनीकों, स्मार्ट एक्वाकल्चर और सतत विकास की रणनीतियों को अपनाकर मत्स्य पालन को और अधिक उन्नत बनाएं। इस आयोजन में प्रतिभागियों को मत्स्य पालन उद्योग में नवीनतम शोध और तकनीकों को समझने एवं नए विचारों के आदान प्रदान का अवसर मिलेगा। नेचर ड्रॉप, चैपलिन एक्वा और स्मार्ट लॉन जैसी कंपनियां इस आयोजन की प्रायोजक हैं, जो मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।