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CG News: छत्तीसगढ़ में निकायों को अब वार्षिक आय के आधार पर मिलेगी ग्रेडिंग, राज्य सरकार ने किया नियमों में बदलाव

CG News: छत्तीसगढ़ नगरपालिका सेवाएं (वेतनमान एवं भत्ते) नियम, 1967 में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत नगर परिषदों एवं नगर पंचायतों के वर्गीकरण से संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है

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CG News: छत्तीसगढ़ में निकायों को अब वार्षिक आय के आधार पर मिलेगी ग्रेडिंग, राज्य सरकार ने किया नियमों में बदलाव

CG News: प्रदेश के निकायों को अब उनकी वार्षिक आय के आधार पर ग्रेडिंग मिलेगी। राज्य सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। चार करोड़ से अधिक वार्षिक आय वाले निकायों को कक श्रेणी का दर्जा मिलेगा। इस तरह जिन नगर पालिका, नगर पंचायतें जिनकी वार्षिक आय दो करोड़ या उससे अधिक होगी परंतु 4 करोड़ से कम होगी उसे क श्रेणी मिलेगी।

इस संबंध में संशोधित आदेश राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। जारी आदेश के अनुसार छत्तीसगढ़ नगरपालिका सेवाएं (वेतनमान एवं भत्ते) नियम, 1967 में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत नगर परिषदों एवं नगर पंचायतों के वर्गीकरण से संबंधित नियमों में बदलाव किया गया है, जिससे निकायों की श्रेणी निर्धारण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी।

चार श्रेणियों में बांटी निकायों की आय

निकायों की श्रेणी को आय के आधार पर चार भागों में बांटा गया है। जिसमें कक, क, ख और ग श्रेणी शामिल हैं। कक श्रेणी में चार करोड़ से अधिक वाले निकाय, क श्रेणी में दो करोड़ से अधिक लेकिन चार करोड़ से कम आय वाले ख श्रेणी में 90 लाख या उससे अधिक लेकिन दो करोड़ से कम, और ग श्रेणी में 90 लाख से कम आय वाले नगर पंचायतें, नगर पालिकाओं को शामिल किया जाएगा।

क्या है अधिसूचना का उद्देश्य

शासन का उद्देश्य नगर परिषदों और नगर पंचायतों के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करना तथा कर्मचारियों की सेवाओं, वेतनमान एवं भत्तों से जुड़े प्रावधानों को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है। इससे नगरीय निकायों के संचालन में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह संशोधन राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशील होगा। यानी 21 जनवरी 2026 से यह नियम लागू माने जाएंगे।

नगर निकायों पर पड़ेगा असर

इस संशोधन का सीधा प्रभाव राज्य की नगर परिषदों, नगर पंचायतों और उनसे जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों पर पड़ेगा। नए वर्गीकरण के आधार पर भविष्य में वेतनमान, भत्तों और प्रशासनिक दायित्वों में भी बदलाव की संभावनाएं बनेंगी। राज्य शासन के इस फैसले को नगरीय प्रशासन व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।