
मुजफ्फरनगर. सुप्रीम कोर्ट की ओर से एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के खिलाफ दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान मुजफ्फरनगर में आगजनी और तोड़फोड़ का आरोप झेल रहे बसपा जिलाध्यक्ष कमल को कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। बंद के दौरान तोड़-फोड़ के बाद आरोपों में जेल गए बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम की जमानत अर्जी न्यायालय ने रद कर दी है। गौरतलब है कि दो अप्रैल को एससी, एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में भारत बंद के दौरान शहर में जबरदस्त तोड़फोड़ और आगजनी हुई थी। इस दौरान कई वाहनों को भी जला दिया गया था।
बाद में पुलिस ने कर्रवाई करते हुए बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम पर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हों गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम के अधिवक्ता की ओर से एसीजेएम-2 रितु नागर की अदालत में जमानत अर्जी दाखिल की गई थी, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया।
अब कोतवाली पुलिस ने गौतम के खिलाफ और भी सक्त रुख अपनाते हुए उनके के खिलाफ 7 और क्रिमनल एक्ट की धाराएं बढ़ा दी है। सीजेएम कोर्ट में कोतवाली में दर्ज हिंसा के मामले में छूटी हुई धारा को जोड़ा गया है। सीजेएम कोर्ट में कमल गौतम को तलब किया गया और उन पर धारा बढ़ाई गई। इस दौरान नई मंडी इलाके में दो अप्रैल को हुए हंगामे के दौरान गिरफ्तार सात आरोपियों की जमानत अर्जी भी एसीजेएम प्रथम अंकुर शर्मा ने रद्द कर दी।
Published on:
12 Apr 2018 05:52 pm
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