
नोएडा। हिंदू कैलेंडर के हिसाब से साल में कुल 24 एकादशी होती है। हर माह में दो एकादशी पड़ती है। इन्हीं में से एक कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। पंडित रामअवतार तिवारी बताते हैं कि इस दिन श्री हरि राजा बलि के राज्य से चातुर्मास का विश्राम पूरा करके बैकुंठ लौटे थे। इसके साथ ही इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है। इसके बाद से शादी जैसे कार्य शुरु किए जाते हैं। इस वर्ष ये शुभ दिन 31 अक्टूबर 2017 यानि मंगलवार को है। इस दिन दिवाली की तरह लोग दीपक भी जलाते हैं। इसे सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं।
यह भी है मान्यता
पंडित जी बताते हैं कि भगवान विष्णु जी चार माह के लंबे शयन के बाद इस दिन उठते हैं। इसलिए 24 एकादशियों में इस एकादशी को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन घर में
गन्ने की पूजा के साथ तुलसी-विष्णु की विवाह के लिए मंडप सजाया जाता है। यह बहुत ही शुभ होता है। इसके साथ ही मां तुलसी का विवाह भगवान सालिगराम (विष्णु जी) के साथ होता है।
हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी के दिन से ही शुरू हो जाते हैं, विवाह
पंडित जी बताते हैं कि हिंदू धर्म में देवउठनी एकादशी के दिन से ही विवाहों का शुभ मुहर्त शुरू हो जाता है। जिसका विवाह अन्य तारीखों में नहीं निकल पाता है या कोर्इ दोष होता है। उन जोड़ों का विवाह देवउठनी एकादशी के दिन किया जाता है। जो बहुत ही शुभ माना जाता है। इसी एकादशी से विवाह की तारीखे खुलती हैं। इस बार भी एकादशी से ही अगले चार माह तक विवाहों का शुभ योग बना रहेगा।
यहां गौर करने वाली बात ये है कि देवउठनी एकादशी को प्रबोधनी एकादशी भी कहा जाता है। इसे पापमुक्त करने वाली एकादशी भी माना जाता है। हालांकि मान्यताओं के अनुसार तो सभी एकादशी पापमुक्त करने वाली मानी जाती हैं, लेकिन इसका महत्व अधिक है। ऐसा कहा जाता है कि जितना पुण्य राजसूय यज्ञ करने से होता है उससे अधिक देवउठनी एकादशी के दिन होता है।
Updated on:
30 Oct 2017 06:46 pm
Published on:
30 Oct 2017 04:24 pm
बड़ी खबरें
View Allनोएडा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
