
नालों के पानी का भी अब होगा इस्तेमाल, विदेशी कंपनी करेगी देसी नालों की सफाई, इस शहर में शुरू हुआ काम
नोएडा। देश में प्रदूषित होती नदियों के जल को स्वच्छ बनाने के लिए अलग से मंत्रालय बनाया गया है, कई हज़ार करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन स्थिति जस की तस है। नालों और नदियों का प्रदूषित पानी नदियों के जल को और भी गंदा कर रहे हैं। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण ने शहर की नालों की सफाई के लिए अमेरिका की कंपनी से हाथ मिलाया है और नोएडा के नालों को साफ करने का दावा किया है। कंपनी ट्रायल के तौर पर सेक्टर-29 नाले के 400 मीटर हिस्से को साफ करेगी, जिसके लिए पांच बायो रिएक्टर मशीन मशीनें लगाई गई हैं, यह मशीनें नालो के पानी को सिंचाई लायक के साथ बदबू रहित भी बनाएंगी। पानी का रंग भी साफ हो जाएगा। यमुना में नालों के जरिए हो रहे प्रदूषण को रोकने में भी मदद मिलेगी।
अमेरिका के कैलीफोर्निया की कंपनी बायो क्लीनर इन कॉपरेटिड कंपनी ने नोएडा के कई हिस्सों में अपना काम भी शुरू कर दिया है। जिसके तहत सैक्टर-29 स्थित क्लब के पास से गुजरते हुए नाले के कुछ हिस्से के पानी को सिंचाई लायक बनाने का काम चल रहा है। यहां पर पांच बायो रिएक्टर मशीन मशीनें लगाई गईं हैं। नाले के पानी को साफ करने के लिए जो प्रक्रिया शुरू की गई है उसकी गुणवत्ता की जांच एक महीने तक लगातार होगी। तकनीकी इंस्टीटयूट एवं उत्तर प्रदेश प्रदूषण विभाग द्वारा जांच की जाएगी। एक महीने की जांच के बाद जो परिणाम आएगा उसके आधार पर आगे बाकी नालों की सफाई का निर्णय लिया जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी राजेश सिंह ने बताया कि नाले की सफाई का काम मैसर्स बायो क्लीनर इन कॉपरेटिड कंपनी को दिया गया है। यह अमेरिका के कैलीफोर्निया की कंपनी है। प्राधिकरण सिंचाई योग्य पानी को उद्यान, खेती, सिंचाई व सड़क की सफाई के काम में लाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि नालों में रोजाना जमा हो रहे सिल्ट से न केवल नालों के जल बहाव पर फर्क पड़ता है, बल्कि जल के ठहराव के कारण नालों से अत्यधिक बदबू व जहरीली गैस का भी रिसाव होता है। इससे मनुष्य का जीवन और प्रकृति भी काफी प्रभावित होती है।
कंपनी अधिकारी संदीप चौधरी ने बताया कि नालों को साफ करने की यह प्रणाली माइक्रोब्स, एरियेशन एवं इमोमबीलाइज्ड माइक्रोब बायो रिएक्टर तकनीक है। माइक्रो आग्रेनिज्म गंदगी को साफ कर साफ पानी में तब्दील कर देंगे। एक तरह से यह माइक्रो जैविक विधि से पानी साफ करने की प्रक्रिया कहलाती है। यह कंपनी कम बिजली खर्च में नालों की सफाई करती है। इसको ग्रीन ए पेटेंट मिला हुआ है। नाले के पानी को साफ करने के लिए शुरू की गई नई तकनीक पर एसटीपी व पानी शोधन संयंत्र के मुकाबले काफी कम खर्चा आएगा। इसके अलावा यह सुविधा पोर्टेबल होने के कारण आवश्यकतानुसार किसी भी नालों आदि पर स्थानांतरित किया जा सकता है।
Published on:
30 Jun 2018 01:16 pm
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