
राहुल चौहान,
नोएडा। इन दिनों देशभर में बिल्डरों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। वहीं शहर में लगातार बायर्स बिल्डरों के खिलाफ प्रदर्शन कर सरकार से अपने लिए घर दिलाने की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा भी लगातार बायर्स को आश्वासन दिया जा रहा है। इसी के चलते 1 मई को उत्तर प्रदेश सरकार ने बिल्डरों पर शिकंजा कसने के लिए रेरा एक्ट लागू किया था। जिससे बायर्स के बीच भी जल्द ही घर मिलने की एक नई आस जगी थी। लेकिन शायद रेरा एक्ट सरकार और बायर्स के अनुमान पर खरा नहीं उतर सका। इसलिए अब बायर्स भी लगातार रेरा एक्ट में कमियां गिना रहे हैं। बायर्स का कहना है कि रेरा की वेबसाइट पर उन्हें सही जानकारी हासिल नहीं हो रही। जिसके चलते वह अपनी शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहे। वहीं कई बायर्स का यह भी कहना है कि शिकायत दर्ज करने के बाद भी बिल्डर के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। जबकि इसका फायद हम बायर्स कम और बिल्डर अपने बचने के लिए ज्यादा उठा रहे हैं।
यूपी में है अस्थाई रेरा एक्ट
दरअसल फिलहाल देश के मात्र 4 राज्यों में ही स्थाई रेरा कानून लागू किया गया है। जबकि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में फिलहाल अस्थाई रेरा कानून लागू किया गया है और बायर्स का कहना है कि जिस तरह से रेरा में शिकायत दर्ज करने की पॉलिसी दी गई है, उससे बायर्स भ्रमित हो रहे हैं। रेरा की वेबसाइट पर बायर्स को किसी भी तरह की जानकारी सही से उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके चलते ही नेफोवा ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रेरा एक्ट के खिलाफ एक रिट पिटिशन भी दायर की है।
बिल्डर्स उठा रहे हैं फायदा
बायर्स का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में इंटरिम रेग्युलेटर होने की वजह से बिल्डर्स अपने प्रोजेकट्स का रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। जबकि बिल्डर रजिस्ट्रेशन से पहले रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट की शर्तों को पूरा नहीं कर रहे हैं। आम्रपाली के एक बायर ने बताया कि यूपी में रेरा कानून लागू करने से पहले बिल्डरों को रजिस्ट्रेशन कराने का समय दिया गया था और उस दौरान कई बिल्डरों ने आनन-फानन में अपने अधूरे प्रोजेक्टों में ही बायर्स को घर दे दिए। जबकि सरकार को बिल्डरों को समय न देते हुए सीधे कार्रवाई करनी चाहिए थी।
दिक्कत जस की तस
नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक ने बताया कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही बिल्डर्स को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाती रही है। जबकि सरकार बदलने के बाद बायर्स को उम्मीद थी कि माहौल बदलेगा, लेकिन अब तक रेगुलेटरी अथॉरिटी नहीं बनने की वजह से बायर्स को कोई फायदा नहीं मिल रहा है। वहीं रेरा में शिकायत दर्ज करने के लिए बायर्स को 1000 रुपया फिस के रूप में देना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि रेरा की वेबासइट पर जिस तरह से जानकारी दी गई है उससे बायर्स भ्रमित हो रहे हैं। सरकार ने जल्दबाजी में वेबसाइट तो बना दी लेकिन उस पर जानकारी सही से नहीं दी गई। न इसमें यह बताया गया है कि बिल्डर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी और न ही इसके लिए किसी कमेटी का गठन किया गया है।
क्या है रेरा एक्ट ?
बता दें कि रेरा एक्ट केंद्र सरकार कानून के तौर पर लायी है। जिसे सभी प्रदेशों को अपने हल्के फुल्के बदलावों के साथ लागू करना होगा। सरकार का उद्देश्य इसके जरिए रियल एस्टेट में होने वाली धांधली को रोकना और प्रोजेक्ट में देरी करने वाले बिल्डर्स पर कार्रवाई करना है। एक्ट के तहत अब कोई भी बिल्डर यदि मल्टीलेवल निमार्ण करता है तो उसे पहले लिखित रूप में हलफनामा देना होगा कि वो उस योजना को कब पूरा करेगा। इस साथ ही हर बिल्डर को ये बताना जरूरी होगा कि किस फ्लैट में कितने एरिया में कंस्ट्रक्शन हो रहा है। बिल्डर को पब्लिक से बुकिंग के नाम पर पैसा लेकर बनाने वाले प्रोजेक्ट का 70 प्रतिशत पैसा उसी निर्माण में लगाना होगा।
Published on:
01 Oct 2017 06:07 pm
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