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जानिए कब है गोवर्धन पूजा और ये हैं शुभ मुहूर्त

Govardhan Puja दीपावली के एक दिन बाद मनाया जाता है, गोवर्धन वाले दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक रूप बना कर श्रीकृष्ण, इंद्रदेव, वरुणदेव, गायें, ग्वाल-बालों, राजा बलि और अग्निदेव का पूजन किया जाता है।

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नोएडा. दिवाली के बाद Govardhan Puja का पर्व मनाया जाता है। गोवर्धन का यह त्योहार दिवाली के बाद ही पड़ता है। दिवाली और गोवर्धन पूजा के पर्वों के बीच एक दिन का अंतर आ जाता है। लेकिन ऐसा कम ही होता है। इस साल 2018 में गोवर्धन पूजा का त्योहार दिवाली के अगले दिन यानि 8 नवंबर को मनाया जाएगा। 7 नवंबर को दिवाली है। Govardhan Puja वाले दिन गोबर से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक रूप बनाया जाता है। उसके बाद में सम्मुख श्रीकृष्ण, इंद्रदेव, वरुणदेव, गायें, ग्वाल-बालों, राजा बलि और अग्निदेव का पूजन किया जाता है।

गोवर्धन पूजा कथा व महत्व

एक समय की बात है कि श्रीकृष्ण अपने मित्र ग्वालों के साथ पशुओं को चराते हुए गोवर्धन पर्वत जा पहुंचे थे। देखा कि बहुत से व्यक्ति एक उत्सव मना रहे थे। श्रीकृष्ण ने जब इसकी वजह जानी तो गोपियों ने कहा कि मेघ व देवों के स्वामी इंद्रदेव की पूजा होगी। इंद्रदेव प्रसन्न होकर वर्षा करेंगे। खेतों में अन्न उत्पन्न होगा और ब्रजवासियों का भरण-पोषण होगा। श्रीकृष्ण सुनकर बोले कि इंद्र से अधिक शक्तिशाली तो गोवर्धन पर्वत है। जिनके कारण यहाँ वर्षा होती है और सबको इंद्र से भी बलशाली गोवर्धन का पूजन करना चाहिए।

श्रीकृष्ण की बात मानकर गोवर्धन की पूजा करने लगे। इंद्रदेव को यह मालूम हुआ तो वे क्रोधित होकर मेघों को आज्ञा दी कि वे गोकुल में जाकर मूसलाधार बरसात करें। बारिश से भयभीत होकर ग्वाले श्रीकृष्ण के पास गए। श्रीकृष्ण ने सबको गोवर्धन-पर्वत की शरण में जाने की बात कहीं। ग्वाले अपने पशुओं समेत गोवर्धन की तराई में आ गए। इन्द्रदेव सात दिन तक निरंतर बरसते रहें, श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र की वजह से ब्रजवासियों पर जल की एक बूंद भी नहीं पड़ी। यह चमत्कार देखकर इन्द्रदेव भी हैरान रह गए। ब्रह्माजी ने इंद्रदेव को बताया कि श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार है। इंद्रदेव सत्य जानकर श्रीकृष्ण से क्षमायाचना की। श्रीकृष्ण ने इन्द्रदेव के अहंकार को चूर-चूर कर दिया था। सातवें दिन गोवर्धन पर्वत को भूमितल पर रखा था। तभी से हर साल गोवर्धन पूजा कर अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है।

गोवर्धन का यह पर्व विशेष रूप से किसान मनाते है। महाराष्ट्र में गोवर्धन के दिन विष्णु अवतार वामन की राजा महाबलि पर विजय के रूप में भी मनाया जाता है। जबकि ‘बलि प्रतिपदा’ व ‘बलि पड़वा’ भी कहा जाता है।

गोवर्धन पूजा 2018 शुभ मुहूर्त

गोवर्धन पूजा पर्व तिथि - 8 नवंबर 2018, दिन गुरुवार

गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त - प्रातः 06:42 बजे से 08:51 बजे तक

गोवर्धन पूजा सायं काल मुहूर्त - दोपहर बाद 03:18 बजे से सायं 05:27 बजे तक

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ - 09:31 बजे से (7 नवंबर 2018)

प्रतिपदा तिथि समाप्त - 09:07 बजे तक (8 नवंबर 2018)