
नोएडा की सोसाइटियों में सांप और बंदरों के काटने की घटनाएं बढ़ी।
Noida News: जंगल काटकर सोसाइटी बनाने का खमियाजा इनमें रहने वाले लोग भुगत रहे हैं। हालात ये हैं कि पर्यावरण और सामाजिक परिवेश में बदलाव के बीच जहां बंदर और कुत्ते खूंखार हो रहे हैं वहीं अब नोएडा की सोसाइटियों में सांप के काटने की घटनाएं भी बढ़ती जा रही है। नोएडा जिला अस्पताल के आंकड़ों को देखें तो अगस्त महीने में करीब 100 लोगों को बंदरोें ने अपना निशाना बनाया है। वहीं 30 लोगों को सांप काट चुका है। जानकारों की मानें तो जंगलों में रहने वाले यह प्राणी अब सोसाइटियों, वाहनों और कारखानों के शोर-शारबे के बीच आकर आक्रमक हो रहे हैं।
नोएडा के सेक्टर-73 में बीते दिनों कोबरा सहित कई खतरनाक प्रजाति के सांपों को वन विभाग टीम पकड़ चुकी है। अन्य सेक्टरों में सांपों और बंदरों के काटने की घटनाएं आम हो चली हैं। जिला अस्पताल में बंदरों के काटने के जून में 60 व जुलाई में 65 मामले सामने आए थे। अगस्त में बंदरों के काटने की घटनाएं 100 तक पहुंच गई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि एंटी रैबीज लेने वालों लोगों की संख्या में 40 प्रतिशत तक का बढ़ोत्तरी हुई है। बंदरों और सांपों के काटने की घटनाएं नोएडा के सोसाइटी में हुई तो अब गांव में ग्रामीण जागरूक हो रहे हैं। पहले एंटी रैबीज लेने वाले ग्रामीणों की प्रतिदिन संख्या 100-120 के करीब थी। वह अब ये संख्या बढ़कर 200 के पार हो गई है। नोएडा जिला अस्पताल में सांप के काटने के प्रतिदिन लगभग दो मामला सामने आ रहे हैं।
चिकित्सकों की माने तो बंदरों के काटने का एक कारण तो उन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिलना है। बंदर पेड़-पौधों के बीच रहना अधिक पसंद करते हैं। जब उन्हें माहौल नहीं मिलता तो उनके स्वभाव में परिवर्तन आता है। कई बार वह खुद पर हमले के डर से हमलावर होते हैं। इधर सेक्टर-122 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष डॉ. उमेश शर्मा बताते हैं कि बंदर व सांप की वजह से निवासी डरे हुए हैं। इस कारण से अब वह अपने बच्चों को सोसाइटी में खेलने की अनुमति नहीं देते।
Published on:
21 Sept 2023 08:15 pm

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