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International Women Day 2018: महिलाओं की सुरक्षा के लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल भटक रही सृष्टि बख्शी

सृष्टी बक्शी हॉंगकॉंग से नौकरी छोड़ महिलाओं की सुरक्षा के सवाल के जवाब में 3800 किमी पैदल निकली है।

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नोएडा। दुनियाभर में आज का दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। इस दिन लोग उन महिलओं को याद कर रहे हैं जिन्होंने समाज में अपना अहम योगदान दिया। वहीं देश की एक बेटी ऐसी भी है जो महिलाओं की सुरक्षा का सवाल लिए कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल भटक रही है। हम बात कर रहे हैं सृष्टी बक्शी की जो हॉंगकॉंग से अपनी नौकरी छोड़ देश में महिलाओं की सुरक्षा के सवाल के जवाब में 3800 किमी पैदल निकली है। इस दौरान सवाल की तलाश में सृष्टी कुछ दिनों पहले ही नोएडा के जेनेसिस पब्लिक स्कूल में आईं जहां उन्होंने अपने अनुभवो को बच्चों के साथ सांझा किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों को समाज में परिवर्तन के लिए काम करने के लिए भी प्रेरित किया।

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सृष्टि बख्शी ने पत्रिका डॉट कॉम से विशेष मुलाकात में बताया की गत वर्ष यूपी के एनएच-91 का वह गैंग रेप केस, जिसमे हाइवे किनारे एक परिवार को बंधक बनाकर एक बेटी के साथ गैंग रेप हुआ था। इस घटना से मुझे बहुत बड़ा शॉक लगा और यह सोचने को मजबूर कर दिया की जब महिलाए-बेटियां परिवार के साथ ही सुरक्षित नहीं है तो अकेले में कैसे सुरक्षित रहेंगी। उन्होंने बताया कि इन बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि हमारे देश में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कुछ करना होगा। इसलिए मैं हॉंगकॉंग में सालाना 60 लाख रुपए पैकेज की जॉब छोड़ भारत आ गई और यहां क्रॉसबो माइल्स नामक संस्था शुरू की, जिसके द्वारा 15 सितंबर 2017 से महिलाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

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सृष्टि ने बताती हैं कि महिलाओं के लिए वह एक पदयात्रा कर रही हैं। जिसमें वह 260 दिनों में कन्याकुमारी से कश्मीर लगभग 3800 किमी पैदल चलेंगी। इस दौरान जिस शहर में वह पहुंचती हैं, वहां गर्ल्स और वुमंस के लिए आईएमए चेंज मेकर, अपने अधिकारों को जानें, डिजिटल साक्षरता, स्वच्छता और नेतृत्व आदि विषय पर एक वर्कशॉप लेती हैं। सृष्टि कहती है की देश में महिलाओ की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई पहल की हैं, कानून भी बनाया गया है। लेकिन लोग जब तक उसमें अपनी भागीदारी नहीं दिखांएगे तब तक सारी योजनाएं कामयाब नहीं होगी।

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बता दें कि महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए सृष्टी कन्याकुमारी से कश्मीर तक 160 दिनों में अपनी पैदल यात्रा का आधा पड़ाव पार कर चुकी हैं और इस दौरान वह करीब 28 हजार लोगों से मिल चुकी हैं। उन्होंने बताया कि मैंने जो तथ्य जमा किए हैं उसके मुताबिक इस समस्या के बारे में बताना चाहूंगी, अब तक मैं 9 राज्यों से होकर गुजर चुकी हूं। सभी प्रदेशों की समस्या एक जैसी ही है। परिवार चाहे संपन्न हो, फिर भी महिलाओं का शोषण होता है। कई जगह छह साल की लड़की को शादी के लिए तैयार करना शुरू कर दिया जाता है और उस छह साल की बच्ची के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज शादी बना दी जाती है। जरूरत है कि अभी जो हमारे समाज में लड़के को कुलदीपक बताया जाता है उस कॉन्सेप्ट को बदला जाए।