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जेपी इंफ्राटेक उठाने जा रहा बड़ा कदम, बायर्स अभी भी निराश

जेपी इंफ्राटेक के लेंडर्स की कमेटी लक्षद्वीप प्रा. लि. से मिलकर चर्चा करेंगे।

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नोएडा। कर्ज में डूबी जेपी इंफ्राटेक कई साल बाद भी बायर्स को उनके सपनों के मकान नहीं दे पा रही। जिसके चलते बायर्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। वहीं इस कर्ज को चुकाने के लिए कंपनी के लेंडर्स की कमेटी (CoC) 7 मई को लक्षद्वीप के प्रपोजल पर चर्चा करेगी। दरअसल, लक्षद्वीप कंपनी ने जेपी इंफ्राटेक को खरीदने के लिए 7,350 करोड़ रुपये का ऑफर दिया है। इसमें से करीब 3 हजार करोड़ रुपये से बायर्स को घर दिए जाएंगे जबकि बचे हुए पैसे से बैंक का लोन चुकाने की बात कही जा रही है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कल जेपी इंफ्रा की कमेटी लक्षद्वीप प्रा. लि. के अधिकारियों से मिलकर बात करेगी। इस दौरान कमेटी कंपनी के प्रपोजल पर चर्रा करेगी और इसके बाद ही किसी तरह का निष्कर्ष निकलेगा। जानकारी के मुताबिक वर्तमान में जेपी इंफ्रा की कुल संपत्ति की वैल्यू करीब 24 हजार करोड़ है। जबकि कंपनी पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें बैंक लोन व फ्लैट पूरे करने का पैसा शामिल है।

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वहीं बायर्स का कहना है कि जेपी इंफ्रटेक को चाहे दूसरी कंपनी टेकओवर करे लेकिन हमें हमारे घर मिलने चाहिए। इसके साथ ही जो घर देने में डिले हो रहा है उसकी पैनल्टी भी हमें चाहिए। वहीं बायर्स ने जेपी इंफ्रा को खऱीदने के लिए लगाई गई बिड पर भी चिंता जाहिर की है और कहा कि जब कंपनी के एसेट वैल्यू 14 हजार से अधिक है तो फिर महज 7,350 रुपये में कंपनी को कैसे खरीदा जा सकता है।

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जेपी बायर प्रमोद ने बताया कि जेपी इंफ्रा को खरीदने के लिए कंपनी ने को वैल्यू लगाई है वह काफी कम है। जबकि एसेट वैल्यू पर गौर करें तो वह इसकी दोगुनी है। उन्होंने बताया कि हमें हमारी घरों से मतलब है और जो कंपनी जेपी इंफ्रा को खरीद रही है उसका कहना है कि बायर्स को घर तो मिलेंगे लेकिन जो देरी हो रही है उसके लिए कोई पैनल्टी नहीं दी जाएगी। हम सुप्रीम कोर्ट में एक पत्र भी दायर करेंगे जिसमें कंपनी की संपत्ति की वैल्यू का विवरण किया जाएगा।