
नोएडा. लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में राजनीतिक दल अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुके है। टिेकट मिलने के बाद में उम्मीदवार अपनी-अपनी तैयारी में जुटे हुए है। सभी दल में उपेक्षित नेताआें की वजह से उम्मीदवारों की परेशानी बढ़ हुई है। सबसे बड़ा पेच उम्मीदवार बदलने से भी फंसा है। बार-बार उम्मीदवार बदलने की वजह से नेताओं में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट पर भी मायावती तीन बार प्रत्याशी बदल चुकी है।
गाजियाबाद लोकसभा सीट सपा और गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट बसपा के खाते में गई है। दोनों ही सीटों पर पार्टी कार्यकर्ता और नेताओं में नाराजगी दिखाई दे रही है। गाजियाबाद लोकसभा सीट पर सपा ने सुरेंद्र कुमार मुन्नी को टिकट दिया था। लेकिन बाद में बसपा के सुरेश बंसल को दे दिया। सुरेश बंसल को आनन-फानन में सपा में शामिल किया गया था। सुरेश बंसल को गठबंधन का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद शानिवार को गोविंदपुरम स्थित फार्म हाउस में नेताओं व कार्यकर्ताओं की मीटिंग हुई थी। मीटिंग में सपा, बसपा व आरएलडी के कार्यकर्ता व नेता मौजूद रहे। लेकिन सपा के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार मुन्नी मीटिंग में नहीं पहुंचे। टिकट कटने के बाद में सुरेंद्र कुमार मुन्नी ने पार्टी से नाराजगी जताई है।
मैदान से गायब हैं नरेंद्र और करतार
बसपा के कद्दावर नेता करतार नागर और सपा के नरेंद्र भाटी अभी प्रचार से दूर है। दोनों ही अपनी—अपनी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे है। करतार सिंह मायावती के गांव बादलपुर के रहने वाले है। वहीं नरेंद्र भाटी मुलायम के करीबी माने जाते है। गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट से नरेंद्र भाटी सांसद का चुनाव लड़ चुके है। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में नरेंद्र भाटी दूसरे नंबर पर रहे थे। करतार सिंह नागर और नरेंद्र भाटी को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है, लेकिन दोनों ही अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में ये दिग्गज नेता चुनावी से क्यों गायब हैं।
अभी और होगा दल-बदल
चुनाव से पहले दल-बदल की राजनीति भी जारी है। मायावती के गृहजनपद गौतमबुद्ध नगर में बसपा के दिग्गज नेता भाजपा का दामन थाम चुके है। इनमें बसपा में मंत्री रहे वेदराम भाटी भी शामिल है।
Published on:
25 Mar 2019 04:15 pm
