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एक वक्त था जब मायावती ने नेताओं में सबसे ज्यादा इनकम टैक्स पे किया

शिक्षण कार्य के दौरान मायावती के सहकर्मी को प्रिंसिपल ने जाति सूचक शब्द कह दिया, जिस पर उन्होंने प्रिंसिपल को थप्पड़ जड़ दिया था

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archana kumari

Jul 26, 2016

mayawati

mayawati

नोएडा
। राजनीति का इतिहास ही होगा कि किसी नेता ने अपने राजनीति के करीयर में इतना ज्यादा टैक्स पे किया हो। यह कोई और नहीं बल्कि बहन जी कही जाने वाली आयरन लेडी मायावती हैं। जी हां, साल 2007-08 में सबसे ज्यादा 26 करोड़ रुपए आयकर देने वाली मायावाती भारतीय राजनेता रही हैं।


बीएसपी प्रमुख मायावती के पास दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चार आलीशान मकान और इमारतें हैं, जिनकी कीमत करीब 96 करोड़ रुपए है। दिल्ली के सबसे महंगे इलाकों में से एक कनॉट प्लेस में मायावती के पास बी-34 का ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर है। 2004 में उनके बैंक अकाउंट में 9 करोड़ 68 लाख रुपए थे। 2010 में वो 11 करोड़ हुए और 2012 में मायावती का बैंक बैलेंस 13 करोड़ 95 लाख रुपए हो चुका है। साल 2007 में मायावती की संपत्ति जहां 52 करोड़ के आसपास थी वो 2012 में 111 करोड़ हो गई मतलब 5 साल में करीब दोगुनी।


राज्यसभा की सदस्यता के लिए नामांकन भरते वक्त मायावती ने अपनी संपत्ति का जो ब्यौरा दिया था, उसके मुताबिक उनके बैंक खाते में 13 करोड़ 73 लाख से ज्यादा की रकम थी। 10 लाख 20 हजार कैश था। 34 ग्राम सोने के गहने, 380 कैरेट के हीरे जिसकी कीमत 95 लाख रुपए हैं। इसके अलावा 18.5 किलो का चांदी का सेट, 15 लाख की कलाकृतियां और साढ़े पांच हजार की एक रिवॉल्वर है।


आइए बीएसपी अध्यक्ष मायावती से जुड़े कुछ ऐसे ही रोचक तत्वों के बारें में जानते हैं, जिनके बारे में शायद ही आपको पता हो।


मायावती का जन्मस्थल है दिल्ली




मायावती का जन्म नई दिल्ली के इंद्रलोक में सरकारी अस्पताल श्रीमती सुचेता कृपलानी में 15 जनवरी 1956 में हुआ। मायावती के पिता प्रभु दयाल एक सरकारी कर्मचारी थे, जो दूरसंचार विभाग में क्लर्क के पद पर तैनात ।, मां का नाम रामरती है। मायावती के छह भाई और दो बहन हैं। मायावती का पैतृक गांव बादलपुर है, जो गौतमबुद्घ नगर जिले में स्थित है।


ऐसे पड़ा मायावती का नाम

मायावती का नाम आखिर मायावती कैसे पड़ा इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है। शैलेन्द्र सेंगर ने एक किताब में लिखा है कि जब 1956 में मायावती ने घर में जन्म लिया तो वह कई खुशियां एक साथ लेकर आई थी। इस बात से खुश होकर उनके पिता ने उनका नाम माया रखा था। दरअसल, माया के आने के बाद उनके पिता का प्रोमोशन हुआ साथ ही ऑफिस में बकाया रकम भी मिली।


मायावती का पूरा नाम यह है


मायावती का पूरा नाम मायावती नैना कुमारी है। बीए करने के बाद दिल्ली के कालिंदी कॉलेज से एल एल बी की उपाधि प्राप्त की साथ ही उन्होंने बीएड भी किया।


पहले लोगों को पढ़ाती थीं


राजनीति में आने से पहले वह दिल्ली के एक स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। भारतीय प्रशासनिक सेवा की परिक्षा के अध्ययन के दौरान 1977 में कांशीराम के संपर्क में आने के बाद मायावती ने एक पूर्ण कालिक राजनीतिज्ञ बनने का निर्णय लिया। पहला चुनाव मुजफ्फरनगर के कैराना लोकसभा सीट से लड़ा।


राजनीति में लाने वाले कांशीराम से ऐसे हुई मुलाकात




माया की मुलाक़ात कांशीराम से कैसे हुई इसके पीछे भी एक कहानी है। सन् 1977 सितम्बर में जनता पार्टी द्वारा दिल्ली के कॉंस्टीट्यूशन क्लब में 'जाति तोड़ो' नामक एक तीन दिवसीय सम्मलेन आयोजित किया गया। इसमें मायावती को भी अपने विचार रखने के लिए बुलाया गया। सम्मलेन का संचालन केंद्रीय मंत्री राजनारायण खुद कर रहे थे। वह कार्यक्रम में बार-बार हरिजन शब्द का प्रयोग कर रहे थे। जब मायावती मंच पर आई तो सबसे पहले उन्होंने हरिजन शब्द पर आपत्ति जताई और कहा की एक तरफ तो आप जाति तोड़ने की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ आप इस शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। क्या इससे देश में जातिवाद को बढ़ावा नहीं मिलेगा? उनके इस तर्कपूर्ण भाषण को सुन सबने उनकी प्रशंसा की थी। यही वह घटना थी, जिसके बाद मायावती ने राजनीति में प्रवेश किया था। यहीं से कांशीराम ने सिविल सर्विसेस की तैयारी करने वाली बेहद मजबूत युवती को राजनीति की तरफ मोड़ा। दरअसल, जाति तोड़ो सम्मलेन में बामसेफ के कुछ नेता मौजूद थे जो इनकी बातों से प्रभावित हुए। वह माया से भी मिले और वहां की बाते कांशीराम को भी बताई। इसके अलावा कई सामाजिक कार्यक्रमों में कांशीराम ने खुद मायावती के विचार सुने, जिनके बाद एक दिन वह खुद मायावती के घर पहुंच गए।


ऐसे बनीं लोगों की बहन जी



अविवाहित होने कारण समर्थकों के बीच बहनजी के नाम से जानी जाती हैं। पहली दलित महिला हैं जो भारत के किसी राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। साल 2007 के विधानसभा चुनाव में पहली बार पूर्ण बहुमत पाकर मुख्यमंत्री बनीं। इससे पहले भी भाजपा के समर्थन द्वारा साल 1995, 1997,2002 और 2007 में भी वह मुख्यमंत्री बनीं थीं।


दलित आंदोलन की समझ




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हर चेतना संपन्न दलित की तरह मायावती में भी दलित आंदोलन की पहली समझ बाबा साहब अंबेडकर की जीवनी और उनकी किताबें पढ़कर आई। इन किताबों से मायावती का पहला परिचय उनके पिता ने कराया। मायावती अपनी आत्मकथा में लिखा है कि, 'तब मैं आठवीं में पढ़ती थी। एक दिन पिताजी से पूछा कि अगर मैं भी डॉ. अंबेडकर जैसे काम करूं तो क्या वे मेरी भी पुण्यतिथि बाबा साहब की तरह ही मनाएंगे?'


छूट गया था पिता का साथ


1984 में बहुजन समाज पार्टी बनने पर ही मायावती सक्रिय राजनीति में उतरीं, लेकिन पिता उनके राजनीति में जाने के विरोधी थे। पिता ने कहा कि अगर कांशीराम का साथ नहीं छोड़ा तो उन्हें परिवार से अलग कर दिया जाएगा। मायावती लिखती हैं, 'पिता जानते थे कि लड़की घर छोड़कर नहीं जा सकती। उन्होंने मुझ पर दबाव बनाया, लेकिन मैंने उनकी नहीं सुनी।' इसके बाद मायावती ने घर छोड़ दिया। इस फैसले में उनके बड़े भाई ने मायावती का साथ दिया। इस दौरान उनके पास सिर्फ सात साल की नौकरी से बचा कुछ पैसा ही था।


यूं ही नहीं कहते आयरन लेडी


मायावती को आयरन लेडी भी कहा जाता है। उनके पिता उनके लिए बचपन में ही यह जुमला प्रयोग किया करते थे की 'पूत के पांव पालने में ही दिखने लगते हैं।' बसपा सुप्रीमो मायावती ने कभी भी हार नहीं मानी चाहे उनका पारवारिक विरोध हुआ हो या फिर राजनीतिक विरोध। उन्होंने कभी हार नहीं मानी बस अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर ध्यान रखा और वह चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बन चुकी है और अब उनकी निगाह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर है।


प्रिंसिपल को जड़ दिया था थप्पड़

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स्कूल में शिक्षण के समय वह भेदभाव बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करती थी या यूं कहे की अन्याय नहीं बर्दाश्त करती थी। जानकार बताते हैं कि शिक्षण कार्य के दौरान ही उनके सहकर्मी को प्रिंसिपल ने जाती सूचक शब्द कह दिए। इससे गुस्सा होकर उन्होंने प्रिंसिपल को ही थप्पड़ जड़ दिया था।


उम्र के हिसाब से हर साल बढ़ता है केक का वजन




मायावती हर साल अपनी उम्र के हिसाब से ही भारी केक काटती हैं और सबसे ख़ास बात यह कि हर केक का शीर्ष गुलाबी पॉइंट से सजा होता है। जो उन्हें काफी पसंद है। माया को अधिकतर पींक सूट और कपड़ों में ही देखा जाता है।


माया को महंगी सैंडल का है शौक


मायावती एक रैली के दौरान जब अपने प्राइवेट प्लेन से नीचे उतरीं तो उनकी महंगी सैंडल कीचड़ में गंदी हो गई जिसे देख उनका बॉडीगार्ड दौड़ा आया और उनकी महंगी सैंडल को अपने रूमाल से साफ करने लगा। इससे पता चलता है कि माया अपने गिफ्ट को कितनी सहजता से इस्तेमाल करती हैं और उन्हें बड़े ही सहजता से संभाल कर रखती हैं।

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