
यूपी के इस कॉलेज ने देश को दिए 3 राज्यपाल
मेरठ। बिहार के राज्यपाल पद से जम्मू कश्मीर के राज्यपाल बनाए गए सत्यपाल मलिक मेरठ कॉलेज से पढ़कर निकले तीसरे ऐसे व्यक्ति हैं, जो किसी प्रदेश के राज्यपाल बने हैं। मेरठ कॉलेज के पूर्व प्रवक्ता एसडी गौड़ ने बताया कि इससे पहले इस कॉलेज से पढ़कर निकले कुंवर महमूद अली मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने थे। कुंवर महमूद अली खां का जन्म सन 1920 में मेरठ जिले के जोगीपुरा गांव में हुआ था। इन्होंने सन 1943 से कांग्रेस सदस्य के रूप में राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी प्रारम्भ कर दी थी।
महमूद अली ख़ां 1968 में 'उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग' के 6 वर्ष के लिए सदस्य नियुक्त किए गए थे। 1980 के बाद उन्होंने स्वयं को पूरी तरह से सक्रिय राजनीति से अलग रखा और सांप्रदायिक सद्भाव के कार्यों तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में गहरी दिलचस्पी लेते रहे। साथ ही वे चन्द्रशेखर के नेतृत्व वाली 'जनता पार्टी' के सदस्य बने रहे। महमूद अली ख़ां 6 फ़रवरी, 1990 में मध्य प्रदेश के राज्यपाल नियुक्त हुए और 23 जून, 1993 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे। उन्होंने जीवन का अधिकांश समय पिछड़े ग्रामीणों और किसानों में जागृति पैदा करने के कार्यों में व्यतीत किया। ये पहली बार 1957 में कांग्रेस के टिकट पर मेरठ से विधायक चुने गए। अप्रैल 2001 में उनका निधन हो गया। इनके अलावा डॉ. रघुकुल तिलक राजस्थान के राज्यपाल रहे।
मूलरूप से बागपत के हिसावदा गांव के रहने वाले सत्यपाल मलिक मेरठ कॉलेज के उन छात्र नेताओं में रहे हैं, जिन्होंने छात्रसंघ की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक देश के मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी इस कॉलेज से पढ़ाई कर चुके हैं। उन्होंने 1966-67 में मेरठ कॉलेज से बीएससी और 1970 में एलएलबी की थी। तब तक छात्रसंघ चुनाव की परंपरा नहीं थी। वह प्रीमियर छात्रसंघ अध्यक्ष बने। इसके बाद फिर खुद दिलचस्पी लेकर चुनाव की नियमावली बनाई और दो बार अध्यक्ष चुने गए। मलिक के जमाने में बनी नियमावली आज भी मेरठ कॉलेज स्टूडेंट यूनियन के चुनाव का आधार है। छात्रसंघ के निर्वाचन में उनसे मिलने के लिए उस समय के कद्दावर नेता चौ. चरण सिंह खुद आए थे।
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सत्यपाल मलिक के कॉलेज से लेकर अभी तक के साथी रहे मेरठ के एनएएस कॉलेज में अर्थशास्त्र के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. नरेंद्र पुनिया बताते हैं कि छात्रसंघ अध्यक्ष रहते हुए सत्यपाल मलिक ने तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री कैलाश प्रकाश के खिलाफ छात्रों को एकजुट कर दिया था, जिसकी वजह से कैलाश प्रकाश चुनाव हार गए थे। छात्र राजनीति से बाहर निकल कर सत्यपाल मलिक 1974 में पहली बार बागपत से विधायक बने, फिर 1989 में अलीगढ़ से सांसद चुने गए। इसके बाद राज्यसभा सदस्य भी रहे। पिछले साल सितंबर में बिहार का राज्यपाल नियुक्त होने के समय वह भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे।
Published on:
23 Aug 2018 02:38 pm
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