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स्पेशल: नोएडा के नलगढ़ा गांव में भगत सिंह व चंद्रशेखर ने बनाए थे बम, भाजपा सरकार में रह गया सिर्फ जंगल

नोएडा के नलगढ़ा गांव में आजादी की लड़ाई के दौरान चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु और सुखदेव छिपकर रहे थे।

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Nalgarha history shaheed bhagat singh and chandrashekhar made bomb

नितिन शर्मा, नोएडा। देश को आजाद कराने में नोएडा के गांव नलगढ़ा की भी बड़ी भूमिका रही है। इसी गांव में क्रांतिकारियों ने बम बनाया था। इतना ही नहीं चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु और सुखदेव यहां तीन वर्ष तक छिपकर रहे थे। उन्‍होंने यहां अंग्रेज सेना पर हमला करने की योजना भी बनार्इ थी। बम बनाने के लिए बारूद व अन्य सामग्रियों को जिस पत्थर पर रखकर मिलाया जाता था, वह आज भी गांव में मौजूद है। पत्थर में दो गड्ढे हैं, जिसमें बारूद को मिलाया जाता था। हालांकि, यह जगह आज भी लोगों की नजरों की ओझल है। इसका कारण है सरकार की उदासीनता। दरअसल, स्‍थानीय सांसद डॉ. महेश शर्मा ने इसे पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित करने के कई वादे किए थे, लेकिन वे सब अधूरे नजर आते हैं। यहां पर्यटन स्थल के नाम पर जमीन तो है, लेकिन आज तक वहां एक बोर्ड लगाने के अलावा कुछ काम नहीं किया गया। लोग आज भी यहां खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।

नलगढ़ा का इतिहास

नोएडा के सेक्टर-145 में स्थित नलगढ़ा गांव महामाया फ्लाइआेवर से 15 किलोमीटर की दूरी पर है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे के किनारे बसा नलगढ़ा गांव पहले हरनंदी (हिंडन) और यमुना नदी के बीच में पड़ता था। यहां नदी के बीच में से और घने जंगल से होकर गांव में पहुंचना पड़ता था। पेड़ों से घिरा होने के कारण इसकी पहचान करना आसान भी नहीं थी। यहां शहीद विजय सिंह पथिक का बड़ा आश्रम था। वह आश्रम में गांवों के नौजवानों को आजादी की लड़ाई के लिए प्रशिक्षण देते थे। इसका देश के अन्य क्रांतिकारियों ने भी फायदा उठाया। चंद्रशेखर आजाद, राजगुरू, सुखदेव व भगत सिंह जैसे महान क्रांतिकारियों ने भी यहां पनाह ली थी। अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और उनके साथियों ने दिल्ली के नजदीक होने के कारण नलगढ़ा को अपना ठिकाना चुना था। वह यहां तीन वर्ष तक छिपकर रहे थे। इस दौरान उन्‍होंने आश्रम में बम बनाये थे। गांव में बिखरी निशानियां आज भी इसकी गवाही देती हैं। असेंबली पर फेंका गया बम भी यहीं बनाया गया था। यहां रहने वाले सिंधु परिवार के करनैल सिंह ने क्रांतिकारियों का साथ दिया था। करनैल सिंह सुभाष चंद्र बोस की स्पीच पढ़ते थे। उनका परिवार आज भी यहां रहता है।

यह बनी थी योजना

वहीं, नलगढ़ा गांव का इतिहास सामने आने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने इसे चमकाने के लिए कर्इ बार योजना बनाई। ये सभी प्लानिंग आज से 17 साल पहले सन् 2001 में की गर्इ थी। इसके लिए उस समय प्राधिकरण में तैनात अधिकारी अरुणवीर सिंह ने नलगढ़ा में स्मारक के लिए 53 हजार 260 वर्ग मीटर जमीन आरक्षित की थी। यह लोकेशन महामाया फ्लाईओवर से 15 किलोमीटर और दिल्ली के आईटीओ से लगभग 25 किलोमीटर दूर है। योजना बनी क‍ि शहीद स्मारक परिसर में एक म्यूजियम बनेगा, जिसमें क्रांतिकारियों की यादों को संजोकर रखा जाएगा। इसमें शहीद भगत सिंह की जीवनगाथा पत्थरों पर अंकित होगी। उनसे जुड़ी किताबें यहां पुस्तकालयों में होंगी। साथ ही यह भी योजना बनी क‍ि विशेष आयोजनों के दौरान कार्यक्रम के लिए एक थियेटर भी होगा। इसके अलावा कैफेटेरिया व दूसरी दुकानों का भी प्‍लान बना, लेकिन हकीकत में यहां सिर्फ खेत आैर जंगल ही है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने किए थे ये दावे

केंद्रीय मंत्री डॉ. महेश शर्मा ने भी इस गांव को टूरिज्‍म सर्किट में शामिल करने का वादा किया था। उन्होंने कर्इ बार कहा कि टूरिज्‍म सर्किट अक्षरधाम से लेकर आगरा तक बनाया जाएगा। इसमें अक्षरधाम के बाद प्ररेणा स्थल, शहीद स्मारक आैर नलगढ़ा को भी शामिल किया जाएगा, लेकिन हकीकत में ये सब वादे ही रह गए।

दीपक जलाने के बाद आज तक गांव में किसी मंत्री या अधिकारी ने नहीं किया रुख

शहीद भगत सिंह के साथी करनैल सिंह की बहू मनजीत कौर ने बताया कि तीन साल पहले यहां जिलाधिकारी आए थे। उन्होंने पत्थर के पास दीपक जलाया था। इसके बाद कुछ नहीं हुआ। कोर्इ अधिकारी व नेता यहां नहीं आया। शहीद भगत सिंह के नाम पर जो पार्क बनना था, उस जमीन पर जंगल है। गांव में कोर्इ विकास नहीं किया गया है। सिर्फ वादे किए जाते हैं, फिर कोर्इ आता नहीं है।