
नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही 29 साल का अंधविश्वास तोड़ने के लिए नोएडा पहुंच चुके हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि वे अभी इस मिथक को नहीं तोड़ पाए हैं। दरअसल, लोगों का मानना है कि सीएम नोएडा पहुंच गए हैं तो उन्होंने 29 साल से चले आ रहे अंधविश्वास को तोड़ दिया है, लेकिन अगर आप आंकड़ों पर गौर करेंगे तो पता चल जाएगा कि इस मिथक को तोड़ने के लिए योगी को कम से कम चार साल का इंतजार करना पड़ेगा।
दरअसल, योगी आदित्यनाथ इसी साल यूपी के मुख्यमंत्री बने हैं और अगामी विधानसभा के लिए चार साल से ज्यादा का समय बचा हुआ है। ऐसे में कम से कम इस मिथ को टूटने के लिए चार साल का इंताजार करना पड़ेगा। वहीं, अगर सीट के हिसाब से देखा जाए तो सूबे में भाजपा को पूर्ण बहुमत है, ऐसे में मध्यावती चुनाव होने के भी आसार नहीं है। इसके अलावा इन आकड़ों पर भी गौर करेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि केवल नोएडा आने भर 29 साल का अंधविश्वास नहीं टूटा है।
2007 में मायावती पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई तो उन्होंने 2011 में नोएडा का दौरा किया। लेकिन, करीब एक साल बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मुंह की खानी पड़ी और उन्हें कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। इससे पहले मायावती ने 1997 में बतौर मुख्यमंत्री भी नोएडा का दौरा किया। दौरे के काफी समय बाद उन्हें कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। 1995 में मुलायम सिंह ने नोएडा का दौरा किया था। हालांकि, मुलायम सिंह उसी साल कुर्सी से हाथ धो बैठे थे। कल्याण सिंह ने 1999 में बतौर मुख्यमंत्री नोएडा का दौरा किया था और उन्हें कुछ समय बाद कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था। 1989 में कांग्रेस के सीएम नारायण दत्त तिवारी ने नोएडा का दौरा किया। दौरा करने के कुछ समय बाद ही उनकी कुर्सी चली गई थी। साल 19988 में कांग्रेस के ही वीर बहादुर सिंह बतौर मुख्यमंत्री पहली बार नोएडा आए थे, जिसके कुछ दिन बाद उनकी कुर्सी चली गई। ऐसे में केवल नोएडा आ जाने भर यह मिथ नहीं टूटता है, इसके लिए अभी और इंताजार करने होंगे।
Published on:
23 Dec 2017 08:03 pm
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