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650 करोड़ का कारोबार कागजों में दिखाकर 128 करोड़ का टैक्स चोरी, दर्ज हुआ पहला केस

बोगस बिलों और फर्जी कंपनियों के जरिए 128 करोड़ रुपए की जीएसटी की चोरी के मामले में राज्य जीएसटी विभाग की ओर से पहली चोरी की एफआईआर दर्ज कराई गई है। बता दें कि 23 टीमों ने एक साथ 4 जिलों की 43 लोकेशन पर छापेमारी की थी। छापेमारी में आधी फर्म के कागजों पर चलने का खुलासा हुआ।

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नोएडा

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lokesh verma

Apr 27, 2022

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उत्तर प्रदेश के कई शहरों में जीएसटी के नाम पर बोगस बिलों के जरिए करीब 650 करोड़ रुपए का कारोबार करने का मामला सामने आया है। यानी इस मामले में बोगस बिलों और फर्जी कंपनियों के जरिए कॉल 128 करोड़ रुपए की जीएसटी की चोरी की गई। यह मामला उस वक्त उजागर हुआ। जब राज्य जीएसटी विभाग की 23 टीमों ने एक साथ 4 जिलों की 43 लोकेशन पर छापेमारी की। शुरुआती जांच में पता चला है कि 43 फर्मों ने सिर्फ कागजों के आधार पर 650 करोड़ रुपए का कारोबार किया है। अब इन सभी कंपनियों पर जीएसटी विभाग ने एफआईआर दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

दरअसल, जीएसटी विभाग के अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि आयरन स्टील की फर्मों के नाम पर लगातार टैक्स चोरी की जा रही है। जिसे गंभीरता से लेते हुए राज्य आयुक्त मिनिस्ती एस ने जीएसटी विभाग को गाजियाबाद और नोएडा जोन में कर चोरी में लिप्त फर्मों को चिन्हित करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। इसके बाद जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने गाजियाबाद और नोएडा जोन के गाजियाबाद, नोएडा, दादरी, हापुड़, बुलंदशहर, खुर्जा और सिकंदराबाद में 49 फर्मों को चिन्हित किया।

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पतों पर नहीं मिली आधे से ज्यादा फर्म

फर्मों को चिन्हित करने के बाद विभाग की 23 टीमों ने 43 फर्मों की लोकेशन पर छापेमारी की। जिसमें लोहा और स्टील से जुड़ी कई फर्मों के पते फर्जी पाए गए। यानी इन फर्मों ने जिस वक्त जीएसटी लिया था और उसमें अपना पता अंकित किया था। उन पतों पर आधी से ज्यादा फर्म नहीं मिली। बड़ी बात यह है कि सभी फर्मों ने चेन बनाते हुए कागजों में ही माल की खरीद और बिक्री दिखाते हुए 650 करोड़ों रुपए का कारोबार किया। जिसके आधार पर 128 करोड़ों रुपए आईटीसी क्लेम भी कर डाला।

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500 से अधिक फर्मों की सूची तैयार

अब विभाग ऐसी सभी फर्मों को लगातार चिन्हित करने में लगा हुआ है। अभी तक विभाग ने 500 से अधिक फर्मों की सूची तैयार की है। जिनकी गहनता से जांच की जा रही है कि उनके द्वारा कितना क्रय और विक्रय किया गया है।

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