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अमरीका में शिकागो के पास इलिनोइस राज्य के ऑरोरा इलाके में स्थित एक हिंदू मंदिर में नवरात्रि के दौरान बड़े पैमाने पर गोलीबारी कर नरसंहार की साजिश का विफल होना राहत की बात है। राइफल में तकनीकी खराबी और साजिश रचने वाले युवक के सहकर्मी की ओर से पुलिस को दी गई सूचना ने बड़ा खतरा भले ही टाल दिया लेकिन यह चिंताजनक इसलिए है कि दुनियाभर में हिंदुओं के प्रति हिंसा और मंदिरों पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल के वर्षों में अमरीका के अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों में हिंदू मंदिरों पर हमले, मूर्तियों की तोडफ़ोड़, धार्मिक स्थलों को अपवित्र करने तथा हिंदू समुदाय को निशाना बनाने की घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं की प्रकृति भले ही अलग-अलग हो, पर सब में हिंदुओं और भारतीय मूल के लोगों के प्रति नफरत का भाव उन्माद की हद तक नजर आया है। जबकि दुनिया के दूसरे देशों में रह रहे भारतीय न केवल अपनी बल्कि संबंधित देश की संस्कृति और कानून का सम्मान करते हैं। 'वसुधैव कुटुम्बकम' और 'सर्वे भवन्तु सुखिन:' जैसी अवधारणा हमारी सांस्कृतिक चेतना का आधार है। इसीलिए दुनिया के किसी भी दूसरे देश में बसे भारतीय अपनी अलग ही पहचान रखते आए हैं। न केवल कारोबारी क्षेत्र में बल्कि पेशेवर तौर पर भी वे दूसरों से अलग नजर आते हैं। कई देशों में तो भारतीय मूल के लोग राजनीतिक रूप से भी ताकत के रूप में उभरकर आए हैं।
ये सब कारण भी हैं, जिनसे नस्लभेद और कट्टरपंथ को हवा देने वाले कुंठित होकर हिंसा की राह पकडऩे वाले कदम उठा लेते हैं। बड़ा कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर हिंदुओं और भारतीयों के खिलाफ अपमानजनक नस्लीय टिप्पणियां और धार्मिक पूर्वाग्रह की बातें भी तेजी से परोसी जा रही है। ताजा घटना में जिस युवक को पकड़ा गया है उससे पुलिस की पूछताछ में यह तथ्य सामने आया है कि वह भारतीयों के खिलाफ न केवल नस्लभेदी टिप्पणियां करता था, बल्कि सशस्त्र हिंसा का भी समर्थन करता था। दुनिया को यह समझना होगा कि किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ घृणा अंतत: पूरी मानवता के लिए खतरा बनती है। यदि हिंदू मंदिरों पर हमले, धार्मिक प्रतीकों का अपमान और नस्लीय हिंसा रोकने के प्रति संबंधित देश ठोस कदम नहीं उठाएंगे तो ऐसी ही आग की चपेट में कभी वे खुद भी आ सकते हैं।दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि नफरत चाहे हिंदुओं के खिलाफ हो या किसी अन्य समुदाय के विरुद्ध, एक सभ्य समाज में इसका कोई स्थान नहीं है। सभी देश अपने यहां रह रहे दूसरे देश के प्रवासियों के प्रति नफरत पैदा करने वाली सामग्री के प्रचार और हिंसा को उकसाने की किसी भी प्रवृत्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
Updated on:
16 Oct 2026 04:11 pm
Published on:
16 Oct 2026 04:10 pm
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