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आपकी बात, क्या लड़कियों की शादी की उम्र कानून बढ़नी चाहिए?

पत्रिकायन में पूछे गए सवाल पर पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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लव मैरिज के बाद मायके गई लड़की, ससुराल में धरने पर बैठा पति, रखी ये मांग

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पुरुष और स्त्री की शादी की न्यूनतम उम्र अलग-अलग क्येां
सवाल यह है कि स्त्री और पुरुष के लिए शादी की न्यूनतम उम्र अलग -अलग क्यों है? शादी की उम्र में अंतर का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। यह रूढि़वादिता को बढ़ावा देता है। साथ ही संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का भी उल्लंघन करता है । भारत में लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिर्पोट के अनुसार 20 वर्ष की उम्र से पहले शादी करने पर गर्भवती होने की स्थिति में महिला और उसके बच्चे के लिए खतरा बढ़ जाता है। अगर लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ेगी, तो उनको शिक्षा पाने के ज्यादा अवसर मिलेंगे और वे अपने जीवन में सही ढ़ंग से फैसला लेने में सक्षम होंगी। लड़के और लड़के की शादी की उम्र अगर बराबर होगी, तो इससे लैंगिक समानता को भी बढ़ावा देगा। लड़की की शादी की न्यूनतम उम्र 18 से बढ़कर 21 कर दी जाएगी, तो यह जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा ।
-मुदिता, सवाई माधोपुर
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सुरक्षा भी जरूरी
वर्तमान लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष है, किन्तु अब केंद्र सरकार लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का विचार कर रही है। इसका मुख्य कारण मातृ मृत्यु दर में कमी लाना और पोषण स्तर में सुधार लाना है। इसके साथ ही लड़की की शादी की उम्र बढऩे से उन्हें शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और वे अपने जीवन में सही ढंग से फैसले लेने में भी सक्षम हो सकेंगी। कई लोग लड़कियों को बोझ समझते हैं। उनकी इस सोच को बदलना जरूरी है। यह समझना जरूरी है कि लड़कियों की शिक्षा भी जरूरी है। लड़कियां सिर्फ शादी करने और बच्चा पैदा करने के लिए नहीं हैं, बल्कि उन्हें भी विकास के सभी अवसर मिलने चाहिए। कानूनी रूप से शादी की उम्र बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि सरकार को उन्हें सुरक्षा भी देनी होगी।
-सुदर्शन सोलंकी, मनावर, धार, मप्र
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कानूनी तौर पर उम्र बढऩी चाहिए
लड़कियों की शादी की कानूनी तौर पर उम्र बढऩी चाहिए, क्योंकि कम उम्र में शादी करने से लड़कियों का शारीरिक और मानसिक विकास नहीं हो पाता, जिससे वे कम उम्र में मां बन जाती हैं। जन्म लेने वाला बच्चा भी पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाता।
- बिहारी लाल बालान लक्ष्मणगढ़ सीकर
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बिना कानून ही बढ़ गई शादी की न्यूनतम उम्र
सुखद, सुरक्षित व खुशहाल जीवनयापन के लिए लड़के तथा लड़कियां अब अपने पैरों पर खड़े होकर ही शादी की सहमति देते हैंं, जिससे स्वत: ही लड़के-लड़कियों की शादी करने की औसत आयु बढ़कर 25 से 30 वर्ष हो गई है ! अब, सरकार चाहे इसे कानूनी सहमति दे या नहीं दे, कोई फर्क नहीं पड़ रहा !
-कैलाश सामोता, कुंभलगढ़, राजसमंद
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जबरन न बांधे शादी के बंधन में
शादी के बाद बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है। इसे निभाने के लिए पूरे मन से तैयार होना जरूरी है, तभी रिश्ता निभता है। शादी दोनों ही पक्षों की एक ऐसी व्यवस्था है, जो भविष्य के लिए एक अच्छी पीढ़ी का निर्माण करती है, एक अच्छे परिवार का सृजन करती है, एक उन्नत राष्ट्र की कल्पना साकार होती है। हमें लड़कियों को जबरदस्ती इस बंधन में नहीं बांधना चाहिए। अगर वह शादी के लिए तैयार है, तो शादी की जाए। शादी के बाद भी चाहे, तो वह अपना करियर बना सकती हैं। अगर वह चाहती है कि उसे शादी से पहले कुछ करना है तो उससे उसकी स्वतंत्रता होनी चाहिए। इसमें उम्र का बंधन नहीं डालना चाहिए।
-विभा जैन, बारां
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सक्षम बने हर लड़की
आज की सोच यह है कि पहले लड़की हर तरह से सक्षम बने, किसी पर निर्भर नहीं रहे। फिर शादी करनी चाहिए। वर्तमान समय को देखते हुए शादी की उम्र बढ़ानी ही चाहिए। इससे उन्हें भविष्य बनाने का समय मिलेगा। केवल कानून बन कर ना रहे, वह जमीन पर भी उतरे। समाज में इसके लिए जागरूकता लानी होगी।
-इंदु मोहन जांगीड़, राजसमंद
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बदल गया है समय
पूर्व में हमारे देश में लड़कों को अधिक और लडि़कयों को कम महत्त्व दिया जाता था। समाज में लड़कों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाता था, परन्तु लड़कियों को आगे ना पढ़ाकर उन्हें चूल्हा-चौका सौंप दिया जाता था। यही कारण है कि लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष रखी गई। अब परिस्थिति बदल गई है। लड़की पढ़ रही है, आगे बढ़ रही है। इसलिए उनकी शादी की उम्र भी २१ वर्ष की जानी चाहिए।
-मोनसी, भोपाल
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कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारी से नुकसान
अठारह वर्ष में तो केवल स्कूली शिक्षा पूर्ण होती है। इस उम्र में शादी करने वाली लड़कियों को घर-परिवार और बच्चों पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया जाता है। इस उम्र में लड़कियां शादी के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार भी नहीं होती हैं। अत: लड़कियों की शादी की उम्र भी कानूनी रूप से बढ़ाकर 21 वर्ष की जानी चाहिए, जिससे वह अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर सके, नौकरी कर सके।
-दीप्ति जैन, उदयपुर
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बदलना चाहिए कानून
आज भी समाज का एक तबका ऐसा है, जो लड़की को बोझ समझता है और इसी मानसिकता के साथ अपना बोझ कम करने के लिए उनका जल्द से जल्द विवाह कर दिया जाता है। क्या 18 वर्ष की कच्ची उम्र में एक बालिका को जीवन भर के समझोते में झोंक देना सही है? विवाहोपरांत अनेक महिलाएं अपनी शिक्षा छोड़ देती हैं, भूल सी जाती हैं की उनमें में भी काबिलियत है। ऐसे में यदि यह कानून बदलता है, तो निस्संकोच हम बदलाव और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होंगे
- भानु पटवा, अजमेर
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उम्र बढ़ाने से फायदा नहीं
लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र को नहीं बढ़ाना चाहिए, क्योंकि 18 वर्ष की उम्र में उन्हें कक्षा 12 वी तक की शिक्षा तो प्राप्त हो ही जाती है। साथ ही घर में रहकर घरेलू कार्य और समाज में रहकर अन्य गतिविधियों में भी भाग लेती हैं।
-रवि डोंगरे, कबीरधाम, छत्तीसगढ़
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सपने नहीं होते पूरे
आज लड़कियां भी हर क्षेत्र मे अपना लोहा मना रही है। लड़कों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। अठारह साल तक तो लड़कियों की शिक्षा भी पूरी नहीं हो पाती और इस कारण उनके सपने भी पूरे नहीं हो पाते।
-गुलाब सिंह नरुका, जोधपुर
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अच्छा संदेश जाएगा
लड़कियों की शादी की उम्र कानूनी रूप से बढ़ाने का समाज में अच्छा संदेश जाएगा, क्योंकि वर्तमान में भी परिवार में लड़कियों की शादी करने की जल्दबाजी रहती है। लड़कियों को उनके सपने पूरे करने का अवसर नही मिल पाता। वे शिक्षा ओर करियर के क्षेत्र में पिछड़ जाती हंै। इसलिए सरकार को विवाह की न्यूनतम आयु लड़की- लड़कों की समान कर देना चाहिए।
-जितेन्द्र गौड़, अटरू, बारां
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कम की जाए उम्र
यदि भारत देश को अपनी संस्कृति को बचाना है, तो लड़कियों की शादी की उम्र को घटाना चाहिए। हां, शादी के बाद भी लड़कियां अपना विकास कर पाएं, इसके लिए ससुराल वालों को उनकी आगे की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था करनी चााहिए। साथ ही परिवार नियोजन के उपाय करने चाहिए। शादी की उम्र बढ़ाने का मतलब पाश्चात्य संस्कृति को बढ़ावा देना होगा।
-रमेश जैन, मानसरोवर, जयपुर
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नहीं है कानून की जरूरत
वर्तमान में यों भी पढ़ी-लिखी व नौकरी पेशा लड़कियों की शादी लगभग 27-28 या 30 वर्ष की उम्र के बाद ही हो रही है। दूसरी तरफ कई लड़कियां जो या तो कम पढ़ी-लिखी हैं या जो नौकरी नहीं करना चाहती हैं और उनके माता- पिता व स्वयं लड़कियां अठारह वर्ष की उम्र में शादी कर घर बसाना चाहती हैं, तो उनको रोकना नहीं चाहिए। ऐसी परिस्तिथि में शादी की कानूनन उम्र बढ़ाना उन लड़कियों व उनके माता-पिता के साथ सरासर अन्याय होगा । अत: कानूनन शादी की उम्र बढ़ाना अनुचित है। जिनको शादी नही करनी वे नही करें, उनके साथ कौन जबरदस्ती करता है, लेकिन सभी को एक लकड़ी से हांकना गलत है।
-सुशील मेहता, ब्यावर
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लड़कियों का विकास होगा
अगर लड़कियों की शादी के लिए न्यूनतम आयु बढ़ा दी जाती है, तो उनकी मेंटल ग्रोथ ज्यादा होगी। उनमें अपने आप को लेकर समझ बेहतर होगी। वे अपनी जिंदगी बेहतर तरीके से जी पाएंगी, वे फैसले ज्यादा बेहतर ले पाएंगी। किसी भी स्थिति से बेहतर तरीके से निपट पाएंगी। उन्नीस-बीस साल की उम्र में लड़की मां बनने के लिए मानसिक तौर से पर तैयार नहीं होती है।
-आशीष नेहर, झुंझनूं
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ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को होगा फायदा
भारत में शादी करने की न्यूनतम उम्र लड़कों व लड़कियों के लिए क्रमश: 21 व 18 वर्ष है। बाल विवाह रोकथाम कानून के तहत इससे कम आयु में विवाह गैर कानूनी है , जिसमें 2 साल की सजा और 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। अब सरकार लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। भारत में बड़े शहरों में लड़कियों की पढ़ाई व करियर के प्रति बदलती सोच के कारण उनकी शादी 21 के बाद ही की जाती है। छोटे कस्बों, गांवों में लड़कियों के मुकाबले लड़कों को पढ़ाई व नौकरी करने पर ज्यादा जोर दिया जाता है। लड़कियां की शादी 18 वर्ष के बाद कर दी जाती हैं । यानी इस फैसले का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्र की लड़कियों को होगा, जिससे लड़कियों को पढ़ाई और करियर के लिए समय मिलेगा।
-हिमानी पाराशर, शिवपुरी
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सशक्त होगी नारी
लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र बढ़ानी ही चाहिए। इसका एक कारण यह है कि वर्तमान में महिलाएं सभी क्षेत्रों में अग्रणी हैं। शादी की उम्र बढ़ जाने से वे अपना विकास कर पाएंगी तथा खुद को सशक्त नारी के रूप में बदल पाएंगी।
-संतोष देवी, न्यालीबास, अलवर
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जरूरत नहीं है शादी की उम्र बढ़ाने की
आजकल बच्चों में परिपक्वता जल्दी आ रही है। उन्हें कई माध्यमों से कई सारी जानकारियां मिल रही हैं। उन्हें अच्छा-बुरा जल्दी महसूस होने लगा है। अत: लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है।
-सुभाष चंद्र पारीक, जयपुर
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जनसंख्या नियंत्रण में मददगार
जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा बड़े देश भारत में यदि लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र 18 से 21 वर्ष करते हैं, तो जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण होगा। साथ ही लड़कियों को कम उम्र में मां नहीं बनना पड़ेगा और उनका पोषण अच्छे से हो सकेगा, जिससे उनका शारीरिक, मानसिक, सामाजिक विकास सही तरीके से होगा।
-नरेंद्र वैष्णव, झालावाड़
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समस्याएं बढ़ेंगी
आधुनिक युग में लड़के हों या लड़कियां मानसिक रूप से समय से पहले युवा हो रहे हैं। अत: लड़कियों की शादी की कानूनी उम्र बढ़ाने का कोई कारण नहीं है। पहले ही समाज में विकृतियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में लड़कियों की शादी की उम्र बढ़ गई, तो व्याभिचार बढऩे का खतरा हैं।
-विनोद कटारिया रतलाम