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आपकी बात: आखिर देश में पुलिस की साख क्यों गिरती जा रही है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था, पेश हैं पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

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Police

पुलिस खुद जिम्मेदार
पुलिस प्रशासन का कार्य जनता की सुरक्षा और सहायता करना है, परंतु वर्तमान संदर्भ में देखें तो आज आए दिन बलात्कार, चोरी, डकैती जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। हर गली-मोहल्ले में ऐसी घटनाएं आए दिन हो जाती हैं, जबकि पुलिस को चौकन्ना रहने की आवश्यकता है, लेकिन घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हंै। ऐसे में जनता का पुलिस की निष्क्रियता के कारण विश्वास खत्म होता जा रहा है। एक समय था जब व्यक्ति अपराध करने से पहले सोचता था, उसे पुलिस के नाम से भी डर लगता था, लेकिन आज वह भय खत्म हो चुका है। पुलिस के कुछ कर्मचारियों के निकम्मे होने की वजह से सारा प्रशासन बदनाम हो रहा और साख गिरने के लिए पुलिस स्वयं ही जिम्मेदार है।
-डॉ रेखा सैनी, जयपुर
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पुलिस विभाग में सभी गलत नहीं
हमारे देश की पुलिस अपनी शक्तियों को भूल चुकी है। वह सिर्फ नेताओं के इशारों पर चलने वाली कठपुतली के समान कार्य करने लगी है। इससे उसकी छवि दागदार होती जा रही है। जिस दिन उसको अपनी शक्ति का एहसास हो जाएगा, उस दिन वह नेताओं के इशारों पर नहीं नाचेंगे। इसके बावजूद यह समझना होगा कि सभी पुलिसवाले गलत नहीं होते। कुछ लालची किस्म के लोग पूरे सिस्टम को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। इनकी पहचान कर इन्हें बाहर करना जरूरी है , तब कहीं जाकर पुलिस की छवि में कुछ सुधार आ सकता है।
-मनीष मालवीय, रायसेन
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बेखौफ हैं अपराधी
यूपी के हाथरस के बाद बलरामपुर में हुई वारदात से साफ है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ है ही नहीं। यदि पुलिस लगातार सक्रियता दिखाए तो अपराध कम हो सकते हैं। पुलिस केवल सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं की चापलूसी करती है। चापलूस व्यक्ति सत्य को दरकिनार करता है, उसे केवल अपना ही स्वार्थ दिखाई देता है। इसके लिए वह किसी भी हद तक गिर सकता है। आये दिन हम देखते हैं कि किस प्रकार से पुलिस की नाक के नीचे हत्या, लूट और बलात्कार जैसी घटनाएं अंजाम दी जाती हैं।
-अंकित पीपलवा, जयपुर
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पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
देश में पुलिस कि साख गिरने का मुख्य कारण स्वयं पुलिस की कार्यशैली है। पुलिस का किसी भी शिकायत पर ढुलमुल रवैया अपनाना उसकी कार्य के प्रति नकारात्मकता को ही दर्शाता है। इससे आमजन में पुलिस की मैली छवि बन गई है। चाहे निर्भया केस हो या विकास दुबे के आतंक का मामला हो या वर्तमान में हुई वारदातों को ही लें, तो साफ तौर पर पुलिस की ढीली कार्यशैली स्वत: ही स्पष्ट हो जाती है। बहुत कम मामलों में पुलिस की तत्परता दिखती है। यही वजह है कि आज तक पुलिस पर आमजन विश्वास नहीं करता। पुलिस की साख निरंतर गिरती का रही है ।
-विमल कुमार शर्मा, मानसरोवर जयपुर
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पैसा कमाना ही बन गया लक्ष्य
पुलिस के बारे में कहा गया हैं कि यह कुछ हद तक अपराधियों का संगठित गिरोह है और यह सही भी है। अधिकतर पुलिस वालों का ध्येय पैसा कमाना मात्र है। यही कारण हैं कि यहां बगैर रिश्वत कोई काम नही होता। अपराधियों को संरक्षण और आमआदमी को प्रताडि़त करना पुलिस का मुख्य काम हैं। अगर कोई पुलिसकर्मी ईमानदारी से काम करना भी चाहे तो नेता नहीं करने देते। नेताओं में ही जब कर्तव्यपरायणता और ईमानदारी का अभाव हैं, तो सरकारी कर्मचारियों से क्या आशा की जा सकती है। अधिकतर पुलिसवाले जन कार्यों मे रुचि लेने की बजाय पैसा कमाने और नेताओं की जी हुजूरी मे लगे हैं। यही कारण हैं कि पुलिस की साख निरन्तर गिर रही हैं
-विनोद कटारिया, रतलाम
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कुछ कर्मचारियों के कारण बिगड़ी छवि
पुलिस विभाग में बहुत सारे ईमानदार अफसर व कर्मचारी हैं, लेकिन कुछ अफसरों व कर्मचारियों की वजह से पूरे विभाग की छवि बिगड़ रही है। रसूखदार पुलिस पर दबाव बनाते हैं। इससे पीडि़त व आमजन हताश होते हैं। नेता पुलिस को अपनी सुविधानुसार मोहरा बनाने से नहीं चूकते। जघन्य अपराधों में गलत अनुसंधान, कानूनी दांवपेचों की लंबी प्रक्रिया पुलिस की साख पर विपरीत प्रभाव डालती है।
-मदनलाल लंबोरिया, भिराणी
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पुलिस का रवैया
आए दिन ऐसी घटनाएं होती हैं, जिसमें पुलिस पीडि़त स्त्री का साथ ना देते हुए आरोपियों का साथ देती नजर आती है। फिर किससे राहत की उम्मीद रखें? पीडि़त महिलाएं न्याय ना मिल पाने पर आत्महत्या का रास्ता तक अपनाती हंै।
डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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क्यों बढ़ रहे हैं अपराध
केवल पुलिस पर सवाल उठाना ही काफी नहीं होगा। हमें उन कारणों को भी पहचानना होगा, जिसके कारण लगातार लोगों में आपराधिक प्रवृति बढ़ रही है। इन कारणों में मुख्य रूप से है- वेब सीरिज और अश्लील फिल्में। राजनीति के चलते पुलिस को खुल कर काम करने ही नहीं दिया जाता।
-सुखवीर सिंह, डेगाना, नागौर
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नेताओं की कठपुतली
पुलिस की गिरती साख के पीछे बहुत बड़ा हाथ राजनेताओं, अपराधियों और पुलिस प्रशासन के बीच गठजोड़ का है, जो वोहरा कमेटी की रिपोर्ट में भी जाहिर हुआ। आज पुलिस प्रशासन राजनीतिक आकाओं की अंगुलियों पर चलने वाली कठपुतली प्रतीत होती है, जो अपने ध्येय वाक्य 'अपराधियों में डर, आमजन में विश्वासÓ से विमुख होती दिख रही है। पुलिस प्रशासन को जनता के बीच खोए विश्वास को पुन: प्राप्त करना होगा।
-प्रवीण सैन, जोधपुर
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बढ़ गया भ्रष्टाचार
देश भर में पुलिस की साख निरन्तर गिरती जा रही है। इसके लिए एक नहीं अनेक कारण जिम्मेदार हैं। आज हर विभाग की तरह पुलिस विभाग में भी भ्रष्टाचार पनपा है। बात-बात पर रिश्वत मांगना आम बात हो गई है। भ्रष्टाचार के अलावा वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार प्रशिक्षण का अभाव, अत्याधुनिक हथियारों व वाहन की कमी, कर्तव्य परायणता पर मिलने वाले पुरस्कार की राशि का कम होना, राजनीतिक दखलअंदाजी के कारण भी पुलिस का काम प्रभावित हो रहा है।
-सुनील कुमार माथुर, जोधपुर
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रिपोर्ट लिखवाने से भी कतराते हैं पीडि़त
पुलिस की कार्यप्रणाली और तौर तरीकों से उसकी साख में भारी गिरावट आई है। आमजन थानों में जाकर रिपोर्ट लिखवाने से कतराते हैं। पुलिसकर्मियों की भाषा शालीन और शिष्ट नहीं होती है। आजादी के सत्तर से अधिक सालों के बाद भी हिंदुस्तानी पुलिस का व्यवहार अंग्रेजी हुकूमत के समय की तरह है। कई पुलिस थानों मे पुलिसकर्मियों की कम संख्या काम का दबाव बढ़़ा देती है, जिससे वे चिढ़चिढ़े हो जाते हैं। पुलिस की कार्य पद्धति में आमूल परिवर्तन होना जरूरी है, तभी पुलिस अपनी गिरती साख को संभाल पाएगी।
-नरेश कानूनगो, बेंगलुरु
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बर्बर हो गई पुलिस
देश में पुलिस अधिकतर मामलों में जनता की बजाय सरकार की ही सेवा करती है। प्रभावशाली लोगों को ले-दे कर बचाना तो मानो पुलिस का धंधा बन गया है। उस पर पुलिस की बर्बरता, कस्टडी में मौत, घूस की प्रवृत्ति किसी से छिपी नहीं है। गरीब, कमजोर और हाशिए पर बैठे लोग आज भी पुलिस से राहत की अपेक्षा नहीं कर पाते। आज के जमाने में 'जिसकी लाठी, उसकी पुलिसÓ हो गई है।
-मेघा गोयल, गोविंदगढ़, अलवर
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देश सेवा से मतलब ही नहीं
पुलिस के कई अधिकारी नेताओं की कृपा से इच्छित पद प्राप्त कर लेते हैं। ऐसे अधिकारी इन खास नेताओं के प्रति ही वफादार होते हैं। उन्हें देश सेवा से कोई मतलब नहीं होता। ये सिर्फ उन नेताओं के लिए सरकारी लठैत बन कर कार्य करते हैं।
-बृजराज सिंह, बारां
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पीडि़त के प्रति पुलिस संवेदनशील नहीं
पुलिस की साख गिरने के कई कारण हैं। जैसे- अकुशल, कर्तव्यहीनता अथवा भ्रष्टाचार। अपराधियों से मिलीभगत के मामले भी सामने आते रहते हैं। पुलिसकर्मियों में पीडि़त व्यक्ति के प्रति सहानुभूति का अभाव है। अनुसंधान कार्य निष्पक्ष नहीं होता। उच्च अधिकारियों का अपने मातहत कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं है।
-कैलाश चन्द्र स्वर्णकार, भीलवाड़ा
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पुलिस प्रशासन में बड़े सुधार की आवश्यकता
समाज में अपराध को रोकने एवं कानून व्यवस्था को बनाए रखने की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी पुलिस व सुरक्षाबलों पर होती है। मुश्किल यह है कि पुलिसकर्मी इन जिम्मेदारियों को दरकिनार करते हुए अमानवीय कृत्यों से समूचे पुलिस तंत्र पर बदनुमा दाग लगा रहे हैं। अपराधियों के साथ पुलिस की सांठगांठ और निर्दोष लोगों को अकारण प्रताडि़त करने की प्रवृत्ति के कारण आम जनमानस में पुलिस की छवि में निरंतर गिरावट आ रही है। अत: वर्तमान में पुलिस प्रशासन में बड़े सुधार की आवश्यकता है।
-हर्षिता शर्मा, जयपुर
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निष्पक्षता से काम करे पुलिस विभाग
पुलिस की साख बेहद खराब है। भ्रष्टाचार की बात करें, तो पुलिस विभाग हमेशा से निशाने पर रहा है। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियेां की वजह से पूरे विभाग को शर्मिंदा होना पड़ रहा है। पुलिस निष्पक्षता से काम करे तो उसकी छवि सुधर सकती है।
-करण राज सोलंकी, तखतगढ़, पाली
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रक्षक नहीं भक्षक
पुलिस को जनता की रक्षक के रूप में देखा जाता है, लेकिन आज पुलिस रक्षक नहीं भक्षक बनती जा रही है। पुलिसकर्मी उन्हीं लोगों की रक्षा करते हैं, जिनसे उनको फायदा होता हो। पुलिसकर्मी खुद महिलाओं पर अत्याचार कर रहे हैं। कुछ लोग तो पुलिसकर्मियों के आतंक के डर से उनके खिलाफ शिकायत ही दर्ज नहीं कराते। पुलिस सत्य का नहीं शक्ति का साथ देती है।
-अंजु जैन, श्रीगंगानगर
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दबाव में काम करती है पुलिस
देश में पुलिस कि साख इसलिए गिर रही है कि पुलिस सही तरीके से और अपने विवेक से काम नहीं कर रही है। पुलिस दबाव पडऩे पर ही काम करती है।
-शिवदत्त, रायसिंहनगर
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राजनीतिक दखल है बड़ा कारण
देश में पुलिस व्यवस्था पर राजनीतिक दखल उसकी साख गिरने का मुख्य कारण है। विकास दुबे और हाथरस कांड में भी पुलिस पर राजनीतिक दखल स्पष्ट दिखायी पड़ता है।
-भरत बडग़ोती, जयपुर