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Patrika Opinion: पाकिस्तान पर अमरीका कभी नरम, कभी गरम

पाकिस्तान के प्रति बाइडन का नरम रुख तभी जगजाहिर हो गया था, जब उन्होंने अपने पूर्ववर्ती डॉनल्ड ट्रंप की ओर से लगाए प्रतिबंध हटा लिए थे। हाल ही बाइडन प्रशासन ने पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर की मदद के साथ फाइटर जेट एफ-16 को अपग्रेड करने के लिए 45 करोड़ डॉलर का पैकेज भी थमाया।

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Oct 16, 2022
अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन

पाकिस्तान के प्रति अमरीका का नजरिया किसी पहेली से कम नहीं है। अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन के ताजा बयान ने इस पहेली में एक गिरह और डाल दी है। उन्होंने पाकिस्तान को दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताया है, जो लगातार परमाणु हथियार जमा कर रहा है। अमरीका काफी पहले से जानता है कि पाकिस्तान के पास भारत से ज्यादा ऐसे हथियार हैं। बराक ओबामा जब राष्ट्रपति थे, तब भी अमरीका ने चिंता जताई थी कि पाकिस्तान के ये हथियार आतंकियों के हाथ न लग जाएं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों पर नजर रखने वाले बुलेटिन ऑफ एटोमिक साइंटिस्ट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अगर इसी रफ्तार से परमाणु हथियार जमा करता रहा तो 2025 तक उसके पास करीब 200 परमाणु बम होंगे।

इस मुद्दे पर अमरीका की कथनी और करनी का फर्क हैरान करने वाला है। उसे पाकिस्तान खतरनाक देश तो लगता है, पर आतंकवाद को लेकर वह उसके खिलाफ सख्त कदम से बचता रहा है। पिछले महीने 9/11 हमलों की 21वीं बरसी पर बाइडन ने बयान तो दिया कि आतंकी जहां कहीं छिपे होंगे उन्हें ढूंढकर मारा जाएगा, पर पाकिस्तान में सक्रिय आतंकियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बल्कि पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने की अमरीका और चीन की कोशिश जारी है। पाकिस्तान के प्रति बाइडन का नरम रुख तभी जगजाहिर हो गया था, जब उन्होंने अपने पूर्ववर्ती डॉनल्ड ट्रंप की ओर से लगाए प्रतिबंध हटा लिए थे। हाल ही बाइडन प्रशासन ने पाकिस्तान को 1.1 अरब डॉलर की मदद के साथ फाइटर जेट एफ-16 को अपग्रेड करने के लिए 45 करोड़ डॉलर का पैकेज भी थमाया। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस पर दो टूक कहा था, ‘आप किसे बना रहे हैं? सब जानते हैं कि पाकिस्तान यह धन कहां खर्च करेगा।’ चार साल पहले ट्रंप ने पाकिस्तान को दो अरब डॉलर की सुरक्षा सहायता इसलिए स्थगित कर दी थी कि वह तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे समूहों पर कारगर कार्रवाई नहीं कर पाया। इस मोर्चे पर पाकिस्तान अब तक नाकाम रहा है। फिर भी अमरीका उस पर डॉलर बरसाता है, तो उसके इरादों पर सवाल खड़े होते हैं।

आतंकवाद पर पाकिस्तान का ढुलमुल रवैया जगजाहिर है। वह आतंकियों की सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। आइएसआइ की शह पाकर ये आतंकी आज भारत के लिए सिरदर्द हैं, तो कल दूसरे देशों पर भी खतरा मंडरा सकता है। पाकिस्तान से साझेदारी को लेकर अमरीका जितनी सजगता और समझदारी अपनाएगा, दक्षिण एशिया के साथ-साथ उसके लिए भी उतना बेहतर होगा।

Published on:
16 Oct 2022 10:27 pm
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