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आपकी बात, क्या चुनावों में उच्च शिक्षित प्रत्याशियों से मतदाता ज्यादा प्रभावित होते हैं?

पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं। पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

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Nov 15, 2023
आपकी बात, क्या चुनावों में उच्च शिक्षित प्रत्याशियों से मतदाता ज्यादा प्रभावित होते हैं?

उच्च शिक्षित को वरीयता

आजकल मतदाता जागरूक हो चुके हैं। उच्च शिक्षित उम्मीदवार को चुनाव में निश्चित रूप से वरीयता मिलती है। असाक्षर तथा आपराधिक रेकॉर्ड के प्रत्याशी आने वाले समय मे हाशिये पर होंगे। मतदान करने के लिए न्यूनतम आयु तय है। अब प्रत्याशियों के लिए शैक्षणिक योग्यता भी तय करनी चाहिए।

-निर्लेश तिवारी, इंदौर

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मतदाता होते हैं प्रभावित

चुनावों में उच्च शिक्षित प्रत्याशियों से मतदाता बहुत ही ज्यादा प्रभावित होते हैं। मतदाता को लगता है कि शिक्षित प्रत्याशी समस्याओं के समाधान में मददगार साबित होगा। उसकी निर्णय लेने की शक्ति भी अच्छी होती है। वह जनता के हितों की रक्षा करने वाला भी होता है।

-सुरेंद्र बिंदल जयपुर

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राजनीति में अंध भक्ति

असल में उम्मीदवार का शिक्षित होना जरूरी करना चाहिए लेकिन मौजूदा राजनीति में अंधभक्ति का प्रभाव है। इससे मतदाता भी भेड़ चाल चलने को मजबूर हैं, जिससे राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है। अब तो वह नेता ज्यादा सफल है जो देश को धर्म और जाति के आधार पर बांट सके।

-शकील खिलजी,मुंबई

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जनता से जुड़ाव ज्यादा जरूरी

मतदाताओं पर शिक्षा का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है । मतदाता शिक्षा की बजाय यह देखते हैं कि प्रत्याशी का जनता से जुड़ाव कितना है। उसकी कार्यशैली को देखकर ही मतदान करते हैं। उच्च शिक्षित प्रत्याशी यदि किसी उच्च पद पर चुका है, तो यह भी देखा जाता है कि उसने जनता का कितना हित किया है।

-पूजा सोनी, जोधपुर

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उच्च शिक्षा ही काफी नहीं

उच्च शिक्षित होने के साथ प्रत्याशी में चुनावी सूझबूझ, वाकपटुता व संप्रेषण शक्ति का होना भी अति आवश्यक है। उच्च शिक्षित होना प्रथम दृष्टया प्रभावकारी हो सकता है, किंतु विजेता बनने के लिए उसे वहां के मतदाताओं के मानदंडों पर भी खरा उतरना पड़ेगा। मतदाता परखता है कि उसमें उचित धैर्य, समझ शक्ति व आम जन तक अपनी बात सीधे, सटीक व प्रभावशाली तरीके से पहुंचाने की क्षमता है या नहीं।

-जे. डी. यादव, बहरोड़, अलवर

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उच्च शिक्षा का असर

उच्च शिक्षित प्रत्याशी बेहतर होता है। उसे पता होता है आम नागरिकों की क्या परेशानी है और उसे कैसे दूर किया जा सकता है। अंगूठा छाप प्रत्याशी सही-गलत का ठीक तरह से आकलन नहीं कर पाता है। एक पढ़ा लिखा प्रत्याशी सोच समझकर बोलता है। पढ़ा-लिखा प्रत्याशी अगर गरीब घर से होता है, तो वह निश्चित रूप से लोगों की समस्याओं पर ध्यान देता है।

-अशोक कुमार शर्मा, जयपुर

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युवाओं की मुख्य भूमिका

मतदाता होना गौरव की बात है। मतदान कर योग्य व्यक्तियों का चयन करें ताकि लोकतंत्र मजबूत हो और देश चहुंमुखी विकास के रास्ते पर चलता रहे। भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां सभी को स्वतंत्र रूप से अपने मत का प्रयोग करना होता है। इस बार के विधानसभा में भी युवा अग्रणी भूमिका निभाएंगे। प्रत्याशी को सही तरह से परख कर ही वोट करें।

-नरपत सिंह चौहान, जैतारण, पाली

Published on:
15 Nov 2023 05:24 pm
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